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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
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सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
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Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
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It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
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Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
गर्भावस्था के दौरान बीमारी की दवा सभी के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है
Women with PMOS should have yearly NHS checks, says health watchdog

लंदन। यूके में लाखों महिलाओं को प्रभावित करने वाली पीएमओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) के मामले अभी भी ठीक से देखे और निदान नहीं हो पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति को लेकर जागरूकता बढ़ाने और नियमित जांच-परख सुनिश्चित करने की बेहद आवश्यकता है।

पीएमओएस एक जटिल स्वास्थ्य समस्या है जो महिलाओं के हार्मोनल असंतुलन, अनियमित मासिक धर्म, और बांझपन जैसे गंभीर मुद्दों को जन्म देती है। इसके बावजूद, इस स्थिति का निदान और प्रबंधन अभी भी असंगत और अपर्याप्त है, जिससे प्रभावित महिलाओं की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए सालाना स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होनी चाहिए ताकि उनकी स्थिति को समय पर पहचाना और नियंत्रित किया जा सके। स्वास्थ्य देखभाल संस्थान अब इस दिशा में गंभीरतापूर्वक कदम उठा रहे हैं ताकि मरीजों को बेहतर सेवा प्रदान की जा सके।

PMOS का सही निदान क्यों है जरूरी?

PMOS कई बार अनदेखा रह जाता है क्योंकि इसके लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से मेल खाते हैं, जिससे सही समय पर उपचार नहीं हो पाता। नियमित जांच से महिलाओं को सही इलाज मिलने के अवसर बढ़ेंगे और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा।

इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को पीएमओएस के संबंध में अधिक शिक्षित और प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे मरीजों को बेहतर सलाह और उचित उपचार दे सकें।

रोगी वकालत और जागरूकता

महिला स्वास्थ्य संगठनों ने भी NHS को सुझाव दिया है कि वह पीएमओएस के लिए विशिष्ट जांच-पद्धतियों को अपनाए और महिलाओं को इस रोग के प्रति जागरूक करे। इससे रोग के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी और महिला स्वास्थ्य में सुधार होगा।

अंत में, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि पीएमओएस से जुड़ी गलतफहमियों को दूर करके इसे एक गंभीर चिकित्सीय मुद्दा माना जाना चाहिए ताकि प्रभावित महिलाएं सही समय पर सही देखभाल प्राप्त कर सकें।

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