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संयुक्त राष्ट्र कोष संकट में, भुगतानों के लिए समय समाप्ति की चेतावनी
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‘‘हम इसके बाद पहले पन्ने की खबर बनेंगे’’ – टकर ने आइरिश प्रयास को ‘पूरी तरह अद्भुत’ बताया
Nakshatras to Avoid for Borrowing Money, Loans & Financial Transactions
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Data analysis finds a common cricket wisdom may be a myth
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Story of Asvatthama – The Warrior Son of Dronacharya in the Mahabharata

अश्वत्थामा महाभारत के सबसे शक्तिशाली और विवादास्पद योद्धाओं में से एक हैं। वे महान शिक्षक द्रोणाचार्य के पुत्र थे और माना जाता है कि उनके माथे में एक दिव्य मणि embedded थी। इस मणि की पौराणिक कथा भी महाभारत युद्ध से पहले भगवान शिव द्वारा की गई एक भविष्यवाणी से जुड़ी हुई है।

महाभारत के प्रसंग में, अश्वत्थामा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वे द्रोणाचार्य के प्रति बेहद समर्पित थे और युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी वीरता का लोहा मनवाया। उनकी दिव्य मणि को शक्ति का स्रोत माना जाता है, जिसके कारण वे अमरत्व का वरदान भी पाकर अनंतकाल तक जीवित रहने वाले योद्धा माने जाते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अश्वत्थामा का जन्म समुद्रमंथन के दौरान भगवान शिव की एक भविष्यवाणी से जुड़ा था। कहा जाता है कि समुद्रमंथन के समय निकले अमृत से जुड़ी यह मणि उनके माथे में प्रादुर्भावित हुई, जो उन्हें अपराजेय शक्ति प्रदान करती थी। महाभारत युद्ध के बाद, उनकी यह मणि और उनके युद्ध कौशल उन्हें एक रहस्यमय व्यक्ति बनाते हैं।

महाभारत के युद्ध के बाद, अश्वत्थामा पर कई विवाद और आरोप लगे। उन्हें रात के समय सभा में घुसकर पांडवों के शिशुओं की हत्या करने का दोषी ठहराया गया, जिससे वे इतिहास में एक विवादास्पद योद्धा के रूप में याद किए जाते हैं। उनकी यह कृति और अमरत्व की कथा उन्हें भारतीय महाकाव्य में अनूठी और जटिल आकृति बनाती है।

इस प्रकार, अश्वत्थामा महाभारत का एक ऐसा पात्र हैं, जिनकी कहानी वीरता, रहस्य और विवादों से भरी हुई है। उनकी आध्यात्मिक और दिव्य उत्पत्ति ने उन्हें एक अलग ही पहचान दी है, जो भारतीय पौराणिक इतिहास में सदैव जीवित रहेगी।

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