नई दिल्ली। डेलॉयट की हालिया रिपोर्ट में यह उजागर किया गया है कि भारत के जीसीसी (ग्लोबल capability centers) इकोसिस्टम में उच्च मूल्य वाली नवाचार गतिविधियाँ और टियर-2 शहरों का विस्तार प्रमुख रूप से दिखाई दे रहा है। यह बदलाव न केवल भारत की आर्थिक तस्वीर को नया आयाम दे रहा है बल्कि देश के तकनीकी और सेवा क्षेत्र को भी स्थायी विकास की ओर अग्रसरित कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जीसीसी इकाइयों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, खासकर टियर-2 शहरों जैसे पुणे, अहमदाबाद, कोच्चि, और भुवनेश्वर में। ये शहर अब तकनीकी विकास और नवाचार के केंद्र बनते जा रहे हैं, जिससे मुख्य मेट्रो शहरों पर दबाव कम हो रहा है। इस विस्तार का मुख्य कारण टियर-2 शहरों में उपलब्ध कुशल मानव संसाधन, बेहतर आधारभूत संरचना, और कम संचालन लागत है।
डेलॉयट के विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अब केवल लागत सीमित करने पर ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि वे अधिक मूल्य आधारित सेवाओं और नवाचारों की ओर बढ़ रही हैं। इससे न केवल भारतीय जीसीसी इकोसिस्टम में गुणवत्ता बढ़ रही है बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत की मजबूत स्थिति बन रही है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, और डाटा एनालिटिक्स को अपनाने में भारतीय जीसीसी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जो इनके उत्पादकता और प्रभावशीलता को बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं और इससे विदेशी निवेश को भी बल मिलेगा। सरकार द्वारा टियर-2 शहरों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल नेटवर्किंग पर किए जा रहे कार्यों ने इस विकास को और बढ़ावा दिया है।
कुल मिलाकर, डेलॉयट की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत का जीसीसी इकोसिस्टम अब मात्र लागत-कटौती केंद्र नहीं रह गया है बल्कि नवाचार एवं तकनीकी समृद्धि में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है, जो देश की वैश्विक तकनीकी महत्वता को और बढ़ाएगा।

