केरल: मलयालम भाषा की बाल फिल्म “स्कूल चले हम” को राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कारों में उचित मान्यता नहीं मिल सकी, लेकिन यह फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों द्वारा खूब सराही जा रही है। इस फिल्म में नाटकीय और कल्पनात्मक तत्वों का सम्मिश्रण है, जो बच्चों के लिए एक अनोखा और मनोरंजक अनुभव प्रदान करता है।
“स्कूल चले हम” मर्चेंट नेवी के अधिकारियों श्रीकांत ई.जी. और आदित्य यू.एस. द्वारा निर्देशित उनकी दूसरी फीचर फिल्म है। इस फिल्म की कहानी में बच्चों की जिज्ञासा, दोस्ती और कल्पनाशीलता को बखूबी उकेरा गया है। हालांकि फिल्म ने केरल राज्य फिल्म पुरस्कारों में कम ध्यान आकर्षित किया, लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इसे मिल रही प्रशंसा ने इस फिल्म की गुणवत्ता और अपील को प्रमाणित किया है।
फिल्म की सफलता का एक बड़ा कारण इसकी सरल और प्रभावशाली कहानी है, जो न केवल बच्चों को बल्कि वयस्क दर्शकों को भी पसंद आ रही है। नायक पात्रों के माध्यम से मित्रता, साहस और नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण मूल्य आसानी से समझाए गए हैं, जिससे यह फिल्म शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण अब ऐसी फिल्में जिनका पारंपरिक पुरस्कार समारोहों में कम प्रमोट होता है, वे ऑनलाइन दर्शकों तक पहुँच कर नया जीवन पा रही हैं। “स्कूल चले हम” का उदाहरण इस परिवर्तन की एक मिसाल है, जहां फिल्मकारों को अपनी कला को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का एक नया मंच मिला है।
मर्चेंट नेवी के दोनों निर्देशकों ने इस फिल्म के माध्यम से अपने रचनात्मक पक्ष को दर्शाया है और बच्चों के लिए ऐसी कहानी प्रस्तुत की है, जो मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा भी प्रदान करती है। इस फिल्म की सफल ओटीटी रिलीज से यह स्पष्ट हुआ है कि दर्शकों की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं और वे बेहतरीन कंटेंट की तलाश में हैं, चाहे वह बड़े पुरस्कारों से सम्मानित हो या न हो।

