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हैदराबाद, 27 अप्रैल: ताजमहल को लेकर इतिहासकार राना सफवी ने हैदराबाद में आयोजित एक प्रदर्शनी में साझा किए गए अपने विचारों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने ताजमहल को केवल प्रेम का स्मारक नहीं बल्कि एक गहन आध्यात्मिक यात्रा बताया।

इस प्रदर्शनी में आए इतिहासकार राना सफवी ने कहा कि ताजमहल की खूबसूरती और वास्तुकला उसे एक भव्य प्रेम की निशानी बनाती है, लेकिन इसकी पौराणिकता और धर्म-आधारित आयाम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि यह स्मारक मुग़ल संस्कृति की सोच और उस समय के धार्मिक आस्थाओं का मूर्त रूप है।

उन्होंने कहा, “ताजमहल हमारे इतिहास का एक ऐसा प्रतीक है जो प्रेम के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति की भी कहानी कहता है। इसकी स्थापत्य कला में हमने उस युग के संस्कारों और दर्शन को देख सकते हैं जो आज भी हमें प्रेरित करते हैं।”

प्रदर्शनी में मौजूद दर्शकों ने इतिहासकार की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और ताजमहल के प्रति उनकी संवेदनशीलता की सराहना की। राना सफवी ने कहा कि यह स्मारक केवल शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी नहीं बल्कि उस युग के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोणों की भी व्याख्या करता है।

उन्होंने आगे बताया कि ताजमहल के निर्माण में इस्लामी स्थापत्य के साथ ही फारसी और भारतीय कलाओं का मेल भी देखने को मिलता है। यह एक धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण की मिशाल भी है जो सभी समुदायों को जोड़ता है।

इतिहासकार ने कहा कि वर्तमान समय में ताजमहल को केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में देखने के बजाए हमें इस ऐतिहासिक धरोहर के गहरे मायनों को समझना और उसकी आध्यात्मिक प्रेरणा को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ताजमहल हमें प्रेम के साथ ही मानवता, सौंदर्य और समर्पण के महत्व को भी सिखाता है।

हैदराबाद में इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को ताजमहल के बारे में गहराई से अवगत कराना और उसकी असली भूमिका को उजागर करना है। प्रदर्शनी में ताजमहल से संबंधित दुर्लभ तस्वीरें, ऐतिहासिक दस्तावेज़ और विशेषज्ञों के विचार प्रदर्शित किए गए हैं।

राणा सफवी के अनुसार, इतिहास के अध्ययन द्वारा हम उस कालखंड के सामाजिक और धार्मिक परिवेश को बेहतर समझ सकते हैं, जो ताजमहल के निर्माण के समय था। यह स्मारक मात्र एक प्रेम की निशानी नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक है।

प्रदर्शनी का समापन एक संगोष्ठी के साथ हुआ, जिसमें इतिहासकारों, विद्वानों और दर्शकों ने ताजमहल के महत्व पर विचार-विमर्श किया। इस आयोजन ने दर्शाया कि इतिहास केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है।

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