शिलांग, मेघालय। खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद द्वारा छः लाख लोगों को डोरस्टेप डिलीवरी सेवा से वंचित किए जाने को लेकर स्थानीय एक पारंपरिक निकाय ने कड़ी आलोचना की है। इस कदम का उद्देश्य शिलांग और आसपास के क्षेत्रों में स्थित लगभग चार हजार दुकानों के हितों की रक्षा करना बताया जा रहा है, लेकिन इससे आम जनता के लिए सुविधाओं की पहुंच बाधित हो रही है।
खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद ने हाल ही में ब्लिंकिट कंपनी के प्रवेश और स्थानीय बाजार में उनके डिलीवरी सेवा को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया है। परिषद का मानना है कि ब्लिंकिट जैसी ऑनलाइन सुविधा प्रदाताओं के आने से स्थानीय दुकानदारों को गंभीर आर्थिक नुकसान होगा। हालांकि, पारंपरिक निकाय का तर्क है कि इस प्रकार के प्रतिबंध से जनता की सुविधा प्रभावित हो रही है और यह कदम डिजिटल प्रगति के खिलाफ है।
स्थानीय परंपरागत संस्था के एक प्रतिनिधि ने बताया कि छह लाख से अधिक लोगों को इस फैसले के कारण सस्ते और तेज़ डोरस्टेप डिलीवरी सेवा से वंचित होना पड़ रहा है। उन्हें मजबूरन पुराने पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो समय और पैसे की बर्बादी का कारण बनता है। वहीं, बाजार में प्रतिस्पर्धा घटने से गुणवत्ता और मूल्य दोनों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रतिबंध आर्थिक विकास और उपभोक्ता अधिकारों के बीच संतुलन बिठाना चाहिए। जबकि स्थानीय दुकानदारों की सुरक्षा आवश्यक है, डिजिटल सेवाओं को पूरी तरह नकारना सही रणनीति नहीं होगी। राज्यों में डिजिटल वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए समावेशी नीतियों की आवश्यकता है, जो दोनों पक्षों के हितों का संरक्षण करें।
खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद ने अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं दी है, लेकिन चर्चा जारी है कि वे इस मुद्दे पर पुनर्विचार कर सकते हैं। शिलांग निवासी और स्थानीय व्यापारियों के बीच इस मामले को लेकर बहस तीव्र हो रही है और आम जनता इस बात की प्रतीक्षा कर रही है कि निर्णय किस दिशा में जाएगा।

