नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार का सिंथेटिक सेल विकसित किया है जो न केवल खा सकता है बल्कि बढ़ सकता है और खुद को विभाजित भी कर सकता है। इस उपलब्धि को बायोलॉजिकल और सिंथेटिक जीव विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है।
इस अध्ययन के पीछे की टीम ने सबसे पहले इस कृत्रिम सेल की रूपरेखा एक लिपोसोम के रूप में तैयार की, जो फैट से बनी एक छोटी सी बुलबुला होती है। इस बुलबुले के अंदर एक प्रोटीन निर्माण प्रणाली, जिसे PURE कहा जाता है, को रखा गया। PURE सिस्टम में आवश्यक साजो-सामान मौजूद था जो सेल को डीएनए से प्रोटीन्स बनाने की क्षमता प्रदान करता है।
इस प्रक्रिया के दौरान, वैज्ञानिकों ने यह देखा कि यह सिंथेटिक सेल न केवल बाहरी पोषण को अवशोषित कर सकता है, बल्कि वह उसे प्रोटीन में परिवर्तित करने और सेल को बढ़ाने के लिए भी प्रयोग कर सकता है। इसके अलावा, यह सेल अपने को दो भागों में विभाजित कर सकता है, जिससे इसकी जनसंख्या बढ़ाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस खोज से जैव अनुकरणीय सेल डिजाइन और जीव विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी। इस तकनीक के जरिये भविष्य में रोगों के अध्ययन, दवा निर्माण और जैव प्रौद्योगिकी में सुधार हो सकता है।
प्रतिक्रियाओं में प्रमुख वैज्ञानिकों ने बताया कि यह मॉडल प्राकृतिक कोशिकाओं के व्यवहार की समझ को नई दिशा देगा और हमें सिंथेटिक जीवन के वास्तविक स्वरूप तक पहुंचाने में मदद करेगा। हालांकि, इस क्षेत्र में अभी और शोध करने की आवश्यकता है ताकि इस तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके।
यह अध्ययन विज्ञान की दुनिया में कोशिका जीवविज्ञान के प्रति इंसानी ज्ञान की बढ़ती गहराई का संकेत है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

