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SAD says will screen film ‘Satluj’ across Punjab

चंडीगढ़, 27 अप्रैल 2024:

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने घोषणा की है कि वह राज्य भर में जल्द ही फिल्म ‘सतलुज’ का व्यापक प्रदर्शन करेगा। इस फिल्म का पूर्व नाम ‘पंजाब ’95’ था और यह उस दौर की एक महत्वपूर्ण दस्तावेजी कहानी प्रस्तुत करती है जब पंजाब में 1980 के मध्य से 1990 के शुरूआती वर्षों तक उग्रवाद का खौफनाक दौर था।

‘सतलुज’ फिल्म की कहानी पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक न्याय के प्रतीक जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। खालड़ा को उनके साहस और राज्य द्वारा कई मानवाधिकार हननों को उजागर करने के लिए जाना जाता है। इस फिल्म में उस समय के संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक संदर्भों को दर्शाया गया है, जो पंजाब के इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय को बयां करती है।

एसएडी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इस फिल्म के प्रदर्शन का उद्देश्य न केवल खालड़ा की बहादुरी और त्याग को दर्शाना है, बल्कि युवा पीढ़ी को उन कठिन दौरों की समझ देना भी है, जिनसे पंजाब गुज़र चुका है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि हर गांव, हर शहर में इस फिल्म को दिखाया जाए ताकि लोग इतिहास को सही मायनों में समझ सकें।”

फिल्म ‘सतलुज’ का निर्देशन और निर्माण ऐसे कालखंड की सजीव तस्वीर पेश करता है, जो कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। इसमें दिखाए गए दृश्य और कथानक दर्शकों को उस दौर की जटिलताओं और मानवीय संघर्षों के करीब लाते हैं। इसके साथ ही, फिल्म में असाधारण कलाकारों के अभिनय ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है।

पंजाब में जारी गरमागरम राजनीतिक स्थिति में इस फिल्म को लेकर एसएडी की यह पहल काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई विश्लेषक मानते हैं कि फिल्म के माध्यम से इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को न केवल याद किया जाएगा, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख भी मिलेगी।

इससे पहले इस फिल्म को कुछ सीमित जगहों पर ही प्रदर्शित किया गया था, परन्तु अब एसएडी ने इसे पूरे पंजाब में व्यापक स्तर पर प्रचारित करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि फिल्म का व्यापक प्रदर्शन सामाजिक चेतना बढ़ाने और मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में मदद करेगा।

अंततः, फिल्म ‘सतलुज’ न केवल एक फिल्म है, बल्कि एक सामाजिक दस्तावेज भी है जो पंजाब के संघर्षों और उसके नायक जसवंत सिंह खालड़ा के योगदान को यादगार बनाता है। एसएडी की इस पहल को राज्य के विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक वर्गों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं।

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