अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, हाल ही में किए गए हवाई हमलों की एक नई श्रृंखला में ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरानी वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइल और ड्रोन संग्रहण केंद्रों, तथा रणनीतिक कमांड नेटवर्कों को बखूबी तबाह किया गया।
अमेरिका ने शुक्रवार को 90 ईरानी सैन्य लक्ष्यों पर प्रभावी स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए हमलों का वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में दिखाया गया कि अमेरिकी ड्रोन और हवाई फाइटर विमान ने विभिन्न ईरानी सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर व्यापक तबाही मचाई।
तेहरान ने इन हमलों को एक “आक्रामक और गैरकानूनी कदम” बताते हुए कड़ा बदला लेने की चेतावनी जारी की है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने सैन्य तंत्र को अलर्ट कर दिया है और किसी भी तरह के हमले का मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति का हिस्सा हैं, जो पिछले महीनों में कई बार सीमा पर विवाद और जासूसी गतिविधियों की वजह से और भी विकराल होती जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों और सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी सेना ने उच्च तकनीक वाली मिसाइलें और ड्रोन तैनात किए, जिनके कारण ईरान के कुछ सबसे संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान भारी क्षति झेल चुके हैं। ये प्रतिष्ठान ईरान की सामरिक क्षमताओं के केंद्र माने जाते हैं, जिनमें वायु रक्षा प्रणाली से लेकर मिसाइल लॉन्च पैड तक शामिल हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इन हमलों का मकसद क्षेत्र में अमेरिकी रक्षा हितों की सुरक्षा और ईरान के खतरनाक सैन्य अभियानों को रोकना है। उन्होंने यह भी कहा कि ये ऑपरेशन पूर्णतया सटीकता और सावधानी के साथ किए गए ताकि नागरिक क्षेत्रों को नुकसान न पहुंचे।
इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संकट की इस घड़ी में वैश्विक स्तर पर शांतिपूर्ण समाधान खोजने की पहल तेजी से आवश्यक होती जा रही है।
यह ज्ञात हो कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दशकों से विवाद चल रहा है, जो कई बार कूटनीतिक तनावों और सैन्य संघर्षों में बदल गया है। इस ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है, और विश्व समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है।
अगले कुछ दिनों में दोनों देशों की ओर से आने वाले बयान और संयुक्त राष्ट्र के कदम को लेकर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी होंगी।

