नई दिल्ली। जीवन के अंतिम क्षणों में व्यक्ति की इच्छाओं का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है। सैली सार्ल, जो इस विषय पर विचार व्यक्त कर रही हैं, का कहना है कि यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने अंत समय के बारे में खुलकर बात करें ताकि हमारी इच्छाओं का सही तरीके से पालन किया जा सके।
सैली सार्ल का यह बयान एक ऐसे संदर्भ में आया है जहां अंतिम समय की देखभाल (एंड-ऑफ-लाइफ केयर) को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि जीवन के आखिरी दिनों में व्यक्ति की खुशहाली और उसके मन मुताबिक गतिविधियां करना बेहद जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, कुछ लोग अपनी आखिर यात्रा में अजीबोगरीब ख्वाहिशें रखते हैं, जैसे बाघों को खाना खिलाना या हवाई जहाज उड़ाना, जो उनकी मानसिक शांति और संतोष के लिए मायने रखती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी इच्छाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें समझकर बंदोबस्त करना चाहिए ताकि व्यक्ति की जीवन यात्रा पूरी सम्मान के साथ पूरी हो। यह दृष्टिकोण पालीएटिव केयर और हॉस्पिस के लिए भी एक नई दिशा प्रदान करता है, जहां मरीज की शारीरिक सेहत के साथ-साथ उनकी भावनात्मक और व्यक्तिगत जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है।
सैली सार्ल का मानना है कि समाज में अंतिम समय की देखभाल को लेकर खुली चर्चा होनी चाहिए, ताकि परिवार, डॉक्टर और मरीज एक साथ मिलकर बेहतर फैसले ले सकें। इससे न केवल मरीज की इच्छाओं का सम्मान होगा बल्कि उनके परिवार को भी मानसिक शांति मिलेगी।
अंत में, यह भी जरूरी है कि हम अपने परिवार और करीबी से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों तक से खुलकर अपनी अंतिम इच्छाओं के बारे में बात करें। इससे जीवन के आखिरी पड़ाव को बेहतर और सुकूनभरा बनाया जा सकता है।
इस विषय पर और गहराई से बहस व जागरूकता की आवश्यकता है ताकि हर व्यक्ति के अंतिम दिन उसके मुताबिक सम्मानित और सुखद हों।

