नई दिल्ली: विदेशी व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade – DGFT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार भारत ने यूके से आयातित पेट्रोल और डीजल यात्री वाहन (CBUs – Completely Built Units) के लिए नई सीमा निर्धारित की है। इसके तहत कुल 20,000 वाहनों को विशेष छूट वाले आयात शुल्क के अंतर्गत अनुमति दी जाएगी।
इन वाहनों पर लगने वाला कन्सेशनल ड्यूटी दर 30% से 50% के बीच होगा, जो वाहन के आकार पर निर्भर करेगा। यह दर सामान्य आयात शुल्क की तुलना में काफी कम है, जो वर्तमान में 66% से लेकर 110% तक है। यह कदम भारत और ब्रिटेन के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत लिया गया है।
DGFT की इस अधिसूचना का उद्देश्य ब्रिटेन से वाहन आयात को प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। इससे भारतीय बाजार में विदेशी वाहनों की पहुंच आसान होगी, जो उपभोक्ताओं के लिए विकल्पों में वृद्धि करेगा। साथ ही यह भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने में मदद करेगा।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह नया नीति कदम यूके से बेहतर ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी और ब्रांड वैल्यू लेकर आएगा, जिससे घरेलू बाजार में गुणवत्ता और विविधता बढ़ेगी। हालांकि, इस नीति से स्थानीय निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसके कारण उन्हें भी अपनी उत्पादकता और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कोटा प्रणाली एक सीमित अवधि के लिए लागू होगी और इसके बाद समीक्षा की जाएगी। इसके तहत कुल 20,000 वाहनों का प्रवेश सीमा निर्धारित किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयात की मात्रा अत्यधिक न हो और घरेलू उद्योगों को नुकसान न पहुंचे।
वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह नीति भारत-यूके व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगी। हम उम्मीद करते हैं कि इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और भी मजबूत होगा।”
इस समझौते के तहत आयात शुल्क में कटौती से यूके के ऑटोमोबाइल क्षेत्रों को भी लाभ होगा, जहां प्रीमियम और मिड-साइज वाहन निर्माताओं का बाजार मजबूत है।
आगामी महीनों में इस नीति के प्रभाव पर विशेषज्ञों की नजर रहेगी, विशेषकर यह देखना होगा कि भारतीय बाजार में नई वाहनों की मांग और आपूर्ति पर इसका क्या असर पड़ता है।

