नई दिल्ली, 27 अप्रैल: चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल हुई है, जहां गर्भ में ही जुड़वाँ बच्चों की जान बचाने के लिए एक अनूठी चिकित्सा पद्धति का सफल परीक्षण किया गया। इस विश्व प्रथम चिकित्सा परीक्षण के तहत, नैंसी और मार्गो नामक समान जुड़वाँ लड़कियों को उनकी गर्भावस्था के दौरान एक विशेष प्रक्रिया से लाभ प्राप्त हुआ, जिससे उनका सफल विकास सुनिश्चित हुआ।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह नवाचार उपचार उन माताओं और नवजात शिशुओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, जो जटिल गर्भावस्था की चुनौतियों से गुजर रहे हैं। इस प्रक्रिया को विकसित करने वाली टीम में कई जाने-माने वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने लंबे शोध और परीक्षण के बाद इसे मानवीय प्रयोग में लाया।
डॉ. सीमा अग्रवाल, जो इस क्लिनिकल ट्रायल की प्रमुख हैं, ने बताया, “हमने यह नए तरीके से जुड़वाँ गर्भावस्था में संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए तैयार किया है। नैंसी और मार्गो के केस में इस पद्धति ने गर्भ में ही उनकी सुरक्षित वृद्धि सुनिश्चित कर दी।”
विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपचार उन गर्भधारणों में उपयोगी साबित होगा, जहां जुड़वाँ बच्चों के विकास में समस्या आती है, जिससे उनकी मौत या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। इस प्रक्रिया में गर्भाशय के अंदर छोटी सर्जरी के माध्यम से बच्चे के विकास को सुविधाजनक बनाया जाता है, जो पहले संभव नहीं था।
मरीजों के परिवार ने भी इस तकनीकी सफलता की सराहना की है। नैंसी और मार्गो की मां, अंकिता शर्मा ने कहा, “मुझे खुशी है कि नई तकनीक की मदद से मेरी बेटियों को सुरक्षित रूप से जन्म मिला। यह मेरे लिए एक वरदान से कम नहीं।”
इस चिकित्सीय सफलता के बाद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह ट्रीटमेंट वैश्विक स्तर पर अपनाया जाएगा, जिससे लाखों पारिवारिक खुशहाल होंगे। चिकित्सा जगत में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो गर्भावस्था के जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है।

