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'Endometriosis tests would have given me years back'
एंडोमेट्रियोसिस के परीक्षण मुझे वर्षों पहले मिल जाने चाहिए थे
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Endometriosis groups 'crying out' for cut in diagnosis time

नई दिल्ली: एंडोमेट्रिओसिस के मरीजों के लिए अच्छे समाचार हैं। हाल ही में जनरल प्रैक्टिशनर्स (GPs) के माध्यम से दो नए गैर-आक्रामक परीक्षण उपलब्ध कराए गए हैं, जो निदान की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करेंगे। यह पहल एंडोमेट्रिओसिस समूहों समेत चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा भलीभांति स्वागत की गई है, जो वर्षों से इस रोग के निदान में देरी को लेकर आवाज उठा रहे थे।

एंडोमेट्रिओसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) शरीर के अन्य हिस्सों में वृद्धि करने लगती है, जिससे महिला मरीजों को अत्यधिक दर्द और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। परंपरागत रूप से, इसका निदान कई महीनों या वर्षों तक देरी से होता रहा है, जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता प्रभावित होती है।

वर्तमान में GPs के लिए प्रस्तावित गैर-आक्रामक परीक्षण मरीजों को बिना सर्जरी के जल्द जांच का अवसर देंगे। इन परीक्षणों की मदद से शुरुआती लक्षणों के आधार पर संदिग्ध मरीजों को जल्दी पहचान कर विशेषज्ञों को रेफर किया जा सकेगा। इससे न केवल निदान समय घटेगा बल्कि उपचार की शुरुआत भी समय पर हो पाएगी।

एंडोमेट्रिओसिस से जुड़ी विभिन्न सहायता समूहों ने इस कदम को सकारात्मक मानते हुए कहा है कि इससे मरीजों की मानसिक और शारीरिक पीड़ा कम होगी। मरीज अक्सर कई डॉक्टरों के पास जाने के बावजूद सही निदान नहीं पा पाते थे, जिससे उनकी बीमारी बढ़ती जाती थी।

चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार, इस परीक्षण को स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने से मरीजों को बेहतर सहायता मिलेगी और स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक बोझ में भी कमी आएगी। साथ ही, यह कदम महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होगा।

यह आसान और प्रभावी जांच प्रक्रिया महिलाओं को उनकी समस्याओं को समझने और इलाज के लिए सही समय पर सहायता पाने का मौका देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल के बाद एंडोमेट्रिओसिस की पहचान में सुधार होगा और मरीजों का जीवन स्तर बेहतर होगा।

अंततः, यह नई तकनीक मेडिकल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है जो हजारों महिला रोगियों को राहत देगी और लंबे समय तक इलाज में लगने वाले समय को कम करेगी। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही यह परीक्षण सभी GPs के क्लीनिकों में उपलब्ध होंगे और इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों में भी शामिल किया जाएगा।

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