Interview | Shubhanshu Shukla on his new book, ‘The Second Orbit’

नई दिल्ली। अंतरिक्ष यात्री ने हाल ही में अपने अनुभव और अंतरिक्ष में सीखे गए महत्वपूर्ण सबकों के बारे में साझा किया है। विज्ञान संचार के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उन आदतों को वे आज़माते हैं जो उन्हें अंतरिक्ष में अपनानी पड़ी थीं। यह चर्चा विज्ञान प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए बड़े ही प्रेरणादायक सिद्ध हुई है।

उनके अनुसार, अंतरिक्ष में बिताए गए समय ने उनकी सोच को व्यापक और गहरा बना दिया है। उन्होंने कहा कि यहाँ पर विज्ञान संचार का दायित्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि सामान्य लोग अक्सर इस विषय को समझने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसलिए, उन्हें इसे सुलभ और रोचक बनाना आवश्यक होता है ताकि लोगों का विज्ञान में रुचि बनी रहे।

इस इंटरव्यू में, उन्होंने अंतरिक्ष में अपनाई गई कुछ खास आदतों के बारे में भी बताया, जिन्हें वे अब भी अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं। इनमें नियमित व्यायाम, सही खान-पान, और मानसिक संतुलन बनाए रखना शामिल हैं। वे मानते हैं कि ये आदतें न केवल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बल्कि आम जीवन में भी काफी लाभदायक हो सकती हैं।

अंतरिक्ष की अनुकूल परिस्थितियों में जीवित रहना और काम करना किसी भी इंसान के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही ज्ञान और अनुशासन से इसे आसान बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि विज्ञान संवाद के माध्यम से इस ज्ञान को और लोगों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि इससे विज्ञान की समझ बढ़ेगी और हम भविष्य में अधिक सफल मिशनों को अंजाम दे पाएंगे।

इस कार्यक्रम में उन्होंने नई किताब ‘द सेकंड ऑर्बिट’ की भी चर्चा की, जो उनके अंतरिक्ष यात्राओं और अनुभवों पर आधारित है। यह पुस्तक विज्ञान के प्रति जिज्ञासा रखने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी संसाधन साबित होगी। कुल मिलाकर, उनका यह संवाद विज्ञान और अंतरिक्ष यात्रा के प्रति लोगों के दृष्टिकोण को और विकसित करेगा।

Source