हैदराबाद। एक कॉमर्शियल पायलट के शौक से शुरू हुआ प्रोजेक्ट अब पूरे भारत से ड्रोन स्टार्ट-अप्स, इंजीनियरिंग छात्र और हॉबी फ्लायर्स को आकर्षित कर रहा है। हैदराबाद के पास स्थित इस एयरोफार्म में आधुनिक तकनीक और नवाचार का संगम देखने को मिलता है, जहां माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट और ड्रोन की सैर उत्साहजनक अनुभव बन चुकी है।
इस एयरोफार्म की शुरुआत एक प्रोफेशनल पायलट के शौक से हुई थी, जिन्होंने अपने जुनून को व्यावसायिक रूप देने का विचार किया। शुरू में यह एक सीमित संसाधन वाली जगह थी, लेकिन समय के साथ यह भारत के ड्रोन और हल्के विमान उड़ाने के प्रमुख केंद्रों में से एक बन गई है। यहां आने वाले स्टार्ट-अप्स नई तकनीकें विकसित करते हैं, इंजीनियरिंग छात्र उड़ान संबंधित प्रोजेक्ट पर काम करते हैं, और हॉबी फ्लायर्स अपनी उड़ान कौशल को निखारते हैं।
ड्रोन तकनीक और हल्के विमानन उद्योग में तेजी से बढ़ती रुचि को देखते हुए यह एयरोफार्म खासा महत्वपूर्ण हो गया है। सरकार की विभिन्न योजनाओं और निजी निवेश के कारण यहां आने वाले बिजनेस क्लाइंट और शौकिया उड़ान प्रेमी दोनों की संख्या में वृद्धि हुई है।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस क्षेत्र को विशेष आर्थिक और तकनीकी केंद्र बनाने के लिए तमाम पहल की हैं। इससे क्षेत्र की आर्थिक विकास दर में सुधार हुआ है, साथ ही युवाओं को रोजगार और सीखने के नए अवसर मिले हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के केंद्र न केवल विमानन के लिए सक्षम मानव संसाधन तैयार करते हैं, बल्कि भारत की ड्रोन और हल्के हवाई वाहन निर्माण क्षेत्र को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।
इस एयरोफार्म का अनुभव लेने के लिए देशभर से लोग आते हैं, जो तकनीक के प्रति उनकी लगन और रुचि को दर्शाता है। ऐसे केंद्र भविष्य में भारत को एयरोनॉटिक्स में विश्व नेता बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

