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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
भारत के कैंप में ‘आश्चर्य और असमंजस’ ने लिया जन्म, ‘शानदार’ आयरलैंड के खिलाफ अनुकूलन में नाकामी
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सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
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Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
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It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
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Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
गर्भावस्था के दौरान बीमारी की दवा सभी के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है
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तमिलनाडु, 27 अप्रैल: तमिलनाडु पुलिस ने हाल ही में दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से लौटने वाले लोगों की निगरानी तेज कर दी है। इसका उद्देश्य साइबर गुलामी से जुड़े अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों की पहचान करना है। पुलिस राज्य में ऐसे लोगों की सही जानकारी जुटा रही है, जिन्हें लाओस, कंबोडिया और म्यांमार में धोखाधड़ी के कंपाउंडों में कैद किया गया था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उन लोगों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है जो साइबर खतरों के शिकार बन चुके हैं। पिछले कुछ महीनों में, तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग ने कई मामलों की जांच की है जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया के इन देशों से वापस लौटे लोग शामिल थे। इन मामलों में धोखाधड़ी, अवैध बंधुआ मजदूरी और जबरन काम कराने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं।

पुलिस अधिकारी बताते हैं कि इन देशों में साइबर अपराध और स्कैम के जाल लगाए जाते हैं, जहां लोगों को रोजगार या बेहतर जीवन का झांसा देकर पकड़ लिया जाता है। फिर उन्हें इस जाल में फंसाकर शोषण किया जाता है। तमिलनाडु पुलिस इस प्रकार के अपराधों की रोकथाम के लिए सतर्कता बढ़ा रही है और पीड़ितों के पुनर्वास की योजना भी बना रही है।

इस अभियान के तहत पुलिस दल पीड़ितों की सूचना जुटाने के लिए संपर्क बनाए हुए हैं और उनकी मदद के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ सहयोग कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि सही समय पर जानकारी एकत्रित करके अपराधियों के खिलाफ कारगर कदम उठाए जा सकते हैं।

यह कदम न केवल साइबर गुलामी जैसे घातक अपराध को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनके पुनर्वास में भी सहायक सिद्ध होगा। तमिलनाडु पुलिस का यह प्रयास राज्य में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक मिसाल पेश करता है।

सरकार और पुलिस विभाग ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास इस प्रकार की कोई जानकारी हो, तो वह उसे तत्काल संबंधित अधिकारियों को प्रदान करें। इससे साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावी होगी।

इस महत्वपूर्ण मिशन के तहत तमिलनाडु पुलिस अपनी जांच और तफ्तीश को और व्यापक बना रही है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की साइबर गुलामी और धोखाधड़ी को बेनकाब किया जा सके।

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