उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच में नया मोड़ आया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को वायरल ऑडियो-वीडियो क्लिप को लेकर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोमवार को इस गिरफ्तारी की पुष्टि की।
हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र में स्थित उनके कार्यालय से हिरासत में लिए गए राठौर को बाद में देहरादून के डालनवाला थाने लाया गया, जहां उनसे पूछताछ के बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
यह गिरफ्तारी करीब तीन दिन पहले हुई प्रेस वार्ता के बाद की गई है, जिसमें राठौर ने कथित तौर पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कुछ प्राथमिकी रद्द कर दी गई हैं।
उन्होंने बताया था कि उनके खिलाफ बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज चार प्राथमिकी में से दो गलत पाए जाने के कारण रद्द कर दी गईं, जबकि डालनवाला और नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज बाकी दो मामलों की जांच जारी है।
इस मामले की जांच कर रही पुलिस ने राठौर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो क्लिप साझा की, जिनमें बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी गौतम की पहचान गुप्त ‘वीआईपी’ के तौर पर की गई थी। यह क्लिप व्यापक रूप से वायरल हुई थी और विवाद पैदा किया था।
सुरेश राठौर ने हरिद्वार में दर्जनों पत्रकारों से बातचीत में इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने न तो कोई ऑडियो या वीडियो क्लिप जारी की और न ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं या मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई अवांछित टिप्पणी की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बयान से किसी को आहत या दुख पहुंचा हो तो वे इसके लिए खेद जताते हैं।
राठौर ने इसे अपने राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए रची गई साजिश बताया। वहीं, राज्य सरकार के मंत्री देशराज कर्णवाल ने पूर्व विधायक के दावों को ‘गुमराह करने वाला’ बताया और कहा कि उच्च न्यायालय की राहत केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है न कि आरोपों की पल्ला झाड़ना।
अंकिता भंडारी, जो पौड़ी जिले के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं, सितंबर 2022 में लापता हुई थीं। कुछ समय बाद उनका शव बरामद किया गया था। इस केस ने पूरे राज्य में भारी हलचल मचाई थी और विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे। रिसॉर्ट के मालिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर हत्याकांड में दोषी करार दिया गया है।
बता दें कि इस पूरे मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है और जल्द ही और भी खुलासे होने की संभावना है। सुरेश राठौर की गिरफ्तारी इस जांच में एक अहम कदम मानी जा रही है जिससे मामले में नई दिशा मिल सकती है।
इस घटनाक्रम ने राजनीतिक और न्यायिक सियासत के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी सामने रखी है। केंद्र और राज्य सरकार इसके प्रभावों को कम करने के लिए सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
वहीं, सामान्य जनता और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग तेज कर दी है। यह घटना उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल भी उठाती रही है।

