ब्रुनेई, 27 अप्रैल 2024। यूरोपीय संघ (ईयू) ने दक्षिण पूर्व एशियाई देशों से रूस के तेल का उपयोग न करने का स्पष्ट आग्रह किया है। यह अपील ब्रुनेई में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ) के साथ बातचीत के बाद की गई, जिसमें रूस के खिलाफ पश्चिम एशिया और पूर्वी यूरोप में जारी संकट पर चर्चा हुई।
ईयू की वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि रूस के तेल से होने वाली आय सीधे यूक्रेन युद्ध की फंडिंग में लग रही है। उन्होंने सभी आसियान देशों से आग्रह किया कि वे इस संघर्ष को आर्थिक रूप से समर्थन न दें और रूस के तेल से अपने व्यापार को स्वच्छ और शांतिपूर्ण बनाए रखें।
उन्होंने बताया, “हम समझते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया ऊर्जा के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तेल की बिक्री युद्ध को वित्त पोषित न करे।” इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ इस क्षेत्र के साथ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार है ताकि संयुक्त रूप से स्थिरता और शांति सुनिश्चित की जा सके।
आसियान के कई सदस्य देश रूस के तेल पर निर्भर हैं, लेकिन इस अपील ने उनके सामने एक चुनौती प्रस्तुत की है कि वे संतुलन कैसे बनाए रखें। कुछ देशों ने पहले ही रूस के खिलाफ लगे प्रतिबंधों का समर्थन किया है, तो कुछ ने अपनी आर्थिक जरूरतों के अनुसार निष्पक्ष रवैया अपनाया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस अपील से दक्षिण पूर्व एशिया में राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की दिशा प्रभावित हो सकती है। यूरोप के अलावा, अन्य पश्चिमी देशों ने भी रूस के तेल और अन्य ऊर्जा स्रोतों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे यह विवाद और तीव्र होता दिख रहा है।
हालांकि रूस ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है, और उसने बार-बार कहा है कि वह किसी भी युद्ध अपराध में शामिल नहीं है, लेकिन वैश्विक समुदाय में उसके प्रति आशंका बढ़ती जा रही है।
इस वक्त यूरोप और आसियान को यह देखना है कि वे इस संकट का कैसे समाधान निकालते हैं और विश्व शांति के लिए अपनी भूमिका निभाते हैं। यूरोपीय संघ की यह अपील एक बड़े वैश्विक संघर्ष के आर्थिक पहलुओं पर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

