बेंगलुरु: शहर में जल संरक्षण को लेकर राज्य की विभिन्न कर्पोरेशन्स में तालाबों और जल निकासी विभाग (एसडब्ल्यूडी) की स्थापना को लेकर लंबे समय से मांग चली आ रही है। बीबीएमपी (बेंगलुरु महानगरपालिका) के विपरीत, अब तक शहर की पाँचों अन्य कर्पोरेशन्स में तालाबों और एसडब्ल्यूडी के लिए पृथक विभाग नहीं थे। यह स्थिति जल संरक्षण कार्यों में बाधक साबित हो रही थी, जिस पर जल संरक्षण कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने आपत्ति जताई है।
हाल ही में ईस्ट कॉर्पोरेशन ने पहली बार इंजीनियरों को इस क्षेत्र में तैनात किया है, जिससे जल स्त्रोतों की देखरेख और सतत संरक्षण हेतु एक नई दिशा मिल सकती है। इस फैसले का पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है, लेकिन वे अभी भी यह मांग कर रहे हैं कि पूरे शहर में तालाबों और जल निकासी के लिए एक ही प्रशासनिक विभाग बने ताकि समन्वित और प्रभावी कार्यवाही संभव हो सके।
तालाब और भूजल संरक्षण को लेकर बेंगलुरु की जल समस्या काफी गंभीर है। पिछले वर्षों में तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण कई तालाब सूख या प्रदूषित हो चुके हैं, जिनके पुनरुद्धार को लेकर संपूर्ण निगरानी न होने का भी आरोप था। बीबीएमपी में ही तालाबों और एसडब्ल्यूडी का पृथक विभाग होने से वहां कार्यों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि अन्य कर्पोरेशन्स में विभाग न होने के कारण यह काम अधर में लटका रहता है।
इस संबंध में विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों और जल निकासी के लिए एकीकृत प्रशासन ही श्रेष्ठ होगा। अगर एक ही विभाग द्वारा दोनों की देखरेख की जाए, तो संसाधनों का अनुकूल उपयोग एवं बेहतर समन्वय हो सकेगा। इस बदलाव से न केवल जल संरक्षण में सुधार होगा, बल्कि बाढ़ नियंत्रण और जल प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
हालांकि ईस्ट कॉर्पोरेशन द्वारा इंजीनियर नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन वाटर कंजर्वेशन एक्टिविस्ट्स ने अन्य चार कॉर्पोरेशन्स से भी इसी प्रकार के कदम उठाने का आग्रह किया है। वे सरकार से निवेदन कर रहे हैं कि जल संरक्षण को लेकर समग्र और एकीकृत रणनीति बनाई जाए, जिससे बेंगलुरु शहर में जल संकट पर जल्द ही काबू पाया जा सके। इस अभियान का मकसद केवल तालाबों को बचाना नहीं बल्कि शहर के जल तंत्र को मजबूत बनाना है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अंत में कहा जा सकता है कि बेंगलुरु की जल समस्या का स्थाई समाधान तभी संभव होगा जब प्रशासनिक स्तर पर तालाब और जल निकासी दोनों के लिए एक मजबूत, समर्पित विभाग का गठन होगा। ईस्ट कॉर्पोरेशन का यह पहल एक सकारात्मक संकेत है, जिसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देना आवश्यक है। अतिक्रमण, प्रदूषण और अंधाधुंध विकास की समस्याओं को रोकने हेतु नागरिकों का जागरूक होना भी आवश्यक है ताकि वे इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।

