भारत-संबद्ध टैंकर ‘सर्व शक्ति’ हॉर्मुज जलसंधि से गुजरने की कोशिश में
मार्शल आइलैंड्स का झंडा लहराते ‘सर्व शक्ति’ नामक टैंकर, जो लगभग 45,000 टन एलपीजी (तरलित पेट्रोलियम गैस) लेकर चल रहा है, शनिवार को ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से पानी के मार्ग के उत्तर की ओर बढ़ा। इसका लक्ष्य खाड़ी के ओरमन्न की तरफ जाना था।
यह मामला मध्य पूर्व में ऊर्जा के महत्व को दर्शाता है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र विश्व के तेल और गैस के बड़े निर्यातकों में से है। हॉर्मुज जलसंधि विश्व के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है जहां से विश्व के कई देशों को ईंधन और गैस की आपूर्ति होती है।
‘सर्व शक्ति’ का यह मार्ग और स्थिति, वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका और इसके कनेक्शन को दर्शाता है, साथ ही क्षेत्र में राजनीतिक तनावों का भी संकेत देता है। ईरानी द्वीपों के पास से गुजरने वाले जलमार्ग पर निगरानी और सुरक्षा को कड़ा कर दिया जाता है क्योंकि यहां से गुजरने वाले जहाज सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर नज़र रखने से ऊर्जा आपूर्ति तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है। इसके अलावा, लगातार राजनीतिक स्थितियों का असर समुद्री मार्गों और ऊर्जा कच्चे माल की खपत पर पड़ सकता है।
भारत के लिए, यह यात्रा इस तथ्य को प्रमाणित करती है कि देश विश्व ऊर्जा बाजारों से जुड़ा हुआ है और उसे निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए सतर्क रहना होगा। एलपीजी की इस मात्रा को लेकर विश्वसनीयता आवश्यक है, ताकि घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा किया जा सके।
यह घटना ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार, और क्षेत्रीय भू-राजनीति के बीच घनिष्ठ संबंध उजागर करती है, जो भारत समेत वैश्विक स्तर पर अरब सागर से लेकर खाड़ी क्षेत्र तक की स्थिति को प्रभावित करती है।

