Supreme Court ruling on counting staff for Bengal polls crumbled TMC's bid to seize power unfairly: BJP

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने रविवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पिछले 10-12 वर्षों में संवैधानिक उपकरणों का दुरुपयोग करते हुए 80 से अधिक बार विभिन्न अदालतों का रुख किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान स्टाफ की गिनती को लेकर उठाए गए विवादों में टीएमसी की अनुचित सत्ता कब्जे की कोशिश को पूरी तरह से असफल कर दिया है।

भाजपा प्रवक्ता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “टीएमसी हमेशा से ही चुनावों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गड़बड़ी करने की कोशिश करती रही है। उन्होंने अनगिनत बार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का सहारा लिया, लेकिन संविधान के पारदर्शी और उचित नियमों के सामने उनकी सारी कोशिशें विफल रही हैं।” उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को सिद्ध किया है और टीएमसी की साजिशों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि चुनाव अधिकारी जो स्टाफ की गणना करते हैं, उनका कार्य निष्पक्ष और पारदर्शी होना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी ऐसा प्रयास जो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का हो, वह संविधान के खिलाफ है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र की भावना और चुनाव कानूनों की मजबूती का प्रमाण है।

टीएमसी की ओर से अभी तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय चुनावों की निष्पक्षता को लेकर बढ़ते संदेह को दूर करेगा और सभी राजनीतिक दलों को इस बात का सबक देगा कि संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करना आवश्यक है।

इस बीच, अशोकनगर और अन्य विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां पूरी तेजी से चल रही हैं, जहां चुनाव अधिकारी और केंद्रीय बल मतदान की तैयारी में लगे हुए हैं। भाजपा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वे जनता की सेवा एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए संकल्पित हैं।

चुनाव आयोग ने भी कहा है कि वे सभी चुनावी प्रक्रियाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। इस फैसले के बाद राजनीतिक दलों के लिए साफ संदेश गया है कि चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित दबाव अस्वीकार्य होगा।

इस पूरे विवाद ने फिर से चुनाव और न्यायपालिका के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होते हैं, और न्यायपालिका ऐसे मामलों में तटस्थ एवं न्यायपूर्ण फैसले देकर लोकतंत्र की रक्षा करती है।

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