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वाशिंगटन: वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उत्पन्न हुई दिक्कतों के बीच, ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने हाल ही में कहा कि अमेरिकी नौसेना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ भारत की एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) आपूर्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हर्मुज जलसंधि को पुनः खोलने के लिए चीन का सहयोग आवश्यक है।

बेसेंट ने एक बयान में कहा कि वर्तमान ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक बाजारों में प्रतिदिन लगभग दस लाख बैरल की कमी देखी जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी नौसेना और अन्य सहयोगी प्रयास इस कमी को संतुलित करने और आपूर्ति को स्थिर करने के लिए सक्रिय हैं।

उन्होंने हर्मुज जलसंधि को लेकर चिंता जताते हुए बताया कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए, चीन को इस जलसंधि को पुनः खोलने एवं स्वतंत्र संचालन सुनिश्चित करने में सहयोग करना चाहिए। यह क्षेत्र विश्व तेल समृद्धि का मार्ग है और यहां पर व्यवधान वैश्विक बाजार को प्रभावित करता है।

भारत के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश अपनी एलपीजी आपूर्ति के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है। भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया है।

विश्लेषकों के अनुसार, ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की गति धीमी पड़ सकती है, इसलिए सुरक्षित और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति जरूरी है। अमेरिकी नौसेना की भूमिका इसमें सहयोगी बनने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।

बेसेंट के इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयासों की अहमियत को सामने रखा है। ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए सभी बड़े शक्तियों के बीच तालमेल आवश्यक होगा।

इस बीच, तेल के दामों में उतार-चढ़ाव जारी है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्थिरता के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजार में बेहतर नियमन और आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण आवश्यक होगा।

कुल मिलाकर, बेसेंट का यह संदेश वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर संयुक्त प्रयास की जरूरत और चीन समेत अन्य महत्वपूर्ण देशों की भूमिका को रेखांकित करता है ताकि हर्मुज जलसंधि फिर से खुल सके और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आए।

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