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कैंस, फ्रांस: जब दुनियाभर की नजरें ला क्रोइसैट के रेड कार्पेट पर टिकी होती हैं, तब भी मेनाकشى शेड्ढे की कहानी कुछ अलग ही होती है। एक समय ऐसा था जब उन्होंने बिना किसी भले-पूरे इंतजाम के, केवल Bata के जूतों और उधार ली गई साड़ियों के साथ कैंस फिल्म फेस्टिवल का सामना किया।

मेनाकشى शेड्ढे, जो भारतीय सिनेमा की जानी-मानी समीक्षक तथा फिल्म पत्रकार हैं, ने उस दौर की यादों को ताजा करते हुए बताया कि उनके लिए फेस्टिवल केवल एक ग्लैमरस आयोजन नहीं था बल्कि संघर्ष और जिजीविषा की कहानी भी थी। उन्होंने बताया कि कैसे सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

वह उस समय एक युवा पत्रकार थीं, जिन्हें प्रवास के दौरान न तो विशेष परिधान उपलब्ध थे और न ही बड़ी तैयारी। लेकिन जैसी भी परिस्थिति थी, मेनाकशी ने पूरी हिम्मत से उस चुनौती का सामना किया। Bata के आरामदायक जूतों में कदम रखते हुए और दोस्तों से उधार ली गई साड़ियों की मदद से वह रेड कार्पेट की दुनिया का हिस्सा बनीं।

शेड्ढे ने कहा, “कैंस फिल्म फेस्टिवल सिर्फ सितारों और ग्लैमर का नाम नहीं है, यह उन लोगों की भी कहानी है जो सिनेमा के प्रति अपने प्यार और समर्पण के कारण वहां पहुंचे। यह उत्साह और संघर्ष की एक मिसाल है।”

इस कहानी से यह स्पष्ट होता है कि बड़े आयोजनों के पीछे अनकहे प्रेरणादायक किस्से होते हैं, जिन्हें शायद ही कभी बाहरी दुनिया देख पाती है। मेनाकशी शेड्ढे की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि सचमुच की प्रतिभा और लगन ही व्यक्ति को असंभव को संभव करने में सक्षम बनाती है।

कैंस में बिताए गए उनके अनुभव हमें याद दिलाते हैं कि फिल्म उद्योग का हिस्सा बनने के लिए बाहरी चमक-दमक से ज्यादा आंतरिक दृढ़ता और आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। वे आज भी सिनेमा प्रेमियों और पत्रकारों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई हैं।

इस वर्ष जब हम फिर से कैंस फिल्म फेस्टिवल के ग्लोबल मंच पर नजर डालते हैं, तो मेनाकशी शेड्ढे की यह कहानी हमें सिखाती है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए केवल बहुमूल्य पोशाकें और शूज ही नहीं, बल्कि अदम्य साहस और इसी तरह का जुनून जरूरी होता है।

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