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Why ESIC decided to directly run new hospitals: The West Bengal trigger
ईएसआईसी ने नए अस्पताल सीधे चलाने का फैसला क्यों किया: पश्चिम बंगाल की ट्रिगर
As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
भारत के कैंप में ‘आश्चर्य और असमंजस’ ने लिया जन्म, ‘शानदार’ आयरलैंड के खिलाफ अनुकूलन में नाकामी
Only 10.2% women fielded in 20 Assembly polls since passage of women’s Bill in 2023: report
सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
महान जीवन के माध्यम से, कलाकार राजेश आरवी ने सौहार्द और उम्मीद की दुनिया की कल्पना की
Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
विजीनजं में प्राचीन अय्यकुडी मंदिर की खोज | केरल मंदिर इतिहास
It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
क्या निर्धारित करता है आपकी ऊंचाई
Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
गर्भावस्था के दौरान बीमारी की दवा सभी के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है
‘Thinking AI needs to be integrated deeply into every curriculum is a mistake’

IE यूनिवर्सिटी के डीन रफिफ स्रोर का बयान: एआई के ज्ञान व अर्थ पर गलत प्रभाव

स्पेन के IE यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम्स डीन रफिफ स्रोर ने हाल ही में कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) छात्रों के बीच “ज्ञान की एक झूठी छवि” बना रहा है। उनका मानना है कि इस वजह से एआई को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों में शामिल करने के मामले में सावधानी बरतनी चाहिए।

रफिफ स्रोर ने शिक्षा प्रणाली में एआई के प्रभावों पर गहराई से विचार करते हुए यह स्पष्ट किया कि कहीं यह तकनीक छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि यदि बेपरवाही से एआई को पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया गया, तो छात्र इसका दुरुपयोग कर सकते हैं या सतही ज्ञान के साथ संतुष्ट हो सकते हैं।

ऐसे समय में जब शिक्षण संस्थान डिजिटल युग की मांगों के अनुसार अपने तरीकों में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं, रफिफ स्रोर की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह शिक्षकों, नीति निर्धारकों और अकादमिक क्षेत्र को सतर्क करती है। वे कहते हैं कि तकनीक को एक सहायक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए न कि सीखने की प्रक्रिया का पूरी तरह विकल्प।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई को सही मात्रा और सही संदर्भ में शामिल करना चाहिए, जिससे छात्रों की आलोचनात्मक सोच विकसित हो और वे विषय की गहराई से समझ प्राप्त कर सकें। इसके विपरीत, केवल एआई पर निर्भरता से ज्ञान की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है, जो लंबे समय में उनके शैक्षिक और व्यावसायिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों का स्वागत करते हुए, रफिफ स्रोर ने यह भी सुझाव दिया है कि छात्रों को इस तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं की जानकारी देनी चाहिए ताकि वे जिम्मेदारी से इसका उपयोग कर सकें।

यह बयान शिक्षा जगत में एआई के सही उपयोग और पाठ्यक्रम विकास की दिशा में विचारशील बहस को जन्म देने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संदर्भ में नीतिगत बदलाव आवश्यक हैं ताकि तकनीक का प्रभावी एवं नैतिक उपयोग हो सके।

इस तरह की जागरूकता न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों और शिक्षा संस्थानों के लिए भी जरुरी है ताकि वे भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित कर सकें।

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