भारत के समक्ष मरिटाइम सुरक्षा के मुद्दे: IORA बैठक के सन्दर्भ में
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) की वर्तमान अध्यक्षता भारत के हाथ में है। यह संगठन क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गठित है, और इसकी चार्टर में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि सदस्य देश ऐसे मुद्दे उठाने से बचेंगे जो सीधे क्षेत्रीय सहयोग से संबंधित न हों। लेकिन वर्तमान में भारत, समुद्री क्षेत्र में अपनी चिंताओं को उठाने के लिए इस मंच का उपयोग कर सकता है जिससे क्षेत्रीय सहयोग को बेहतर बनाया जा सके।
हाल के वर्षों में भारतीय समुद्री कर्मचारियों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जो न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय हैं। इन हमलों की बढ़ती संख्या ने भारत को समुद्री सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। इसी संदर्भ में, IORA की आगामी बैठक में इन हमलों पर चर्चा होने की संभावना है ताकि एक साथ मिलकर इस चुनौती का सामना किया जा सके।
इसके अलावा, ईरान द्वारा लगाए जा रहे ‘सेवा शुल्क’ को लेकर भी भारत अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहता है। यह शुल्क, जो समुद्री व्यापार में बाधा डाल सकता है, भारत के व्यापारिक हितों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। भारत इस मुद्दे को भी IORA के मंच पर उठाने की योजना बना रहा है ताकि इससे निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सहमति बन सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अध्यक्षता में IORA को अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाने के लिए ऐसी महत्वपूर्ण समस्याओं पर खुलकर चर्चा करना आवश्यक है। इससे न केवल भारत बल्कि पूरे इंडियन ओशियन क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि चार्टर में कुछ सीमित प्रतिबंध हैं, भारत अपनी सदस्यता और अध्यक्षता का लाभ उठाते हुए इन समुद्री सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों को उठाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इससे न केवल समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि पारंपरिक समुद्री मार्गों पर व्यापार की निर्बाधता भी बनी रहेगी।
इस बैठक से उम्मीद है कि भारतीय महासागरीय हितों को मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास एवं सहभागिता की भावना प्रबल होगी। भारत की सक्रिय भूमिका से इंडियन ओशियन क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।

