केरल में शिगेल्लोसिस के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जहां जून महीने तक कुल 85 मामलों की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस घातक संक्रमण को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से विभिन्न सुरक्षात्मक कदम लागू कर दिए हैं।
शिगेल्लोसिस, जो मुख्य रूप से दूषित जल और भोजन के माध्यम से फैलता है, खासकर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए खतरनाक माना जाता है। स्वस्थ वयस्कों में यह संक्रमण सामान्यतः स्व-सीमित होता है, लेकिन बच्चों में इसके कारण मृत्यु दर सबसे अधिक देखी गई है। इसके अलावा बुजुर्ग और इम्यूनोसप्रेस्ड व्यक्ति भी इस संक्रमण के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। नियमित रूप से हाथ धोना, पीने के पानी का शुद्धिकरण, और भोजन को ठीक से पकाना संक्रमण से बचाव के प्रमुख उपाय हैं।
केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने जनता से अपील की है कि वे सभी सावधानियां बरतें और संदिग्ध लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। उन्होंने कहा, “शिगेल्लोसिस की लक्षणों में बुखार, दस्त, पेट दर्द और उल्टी शामिल हो सकते हैं। जल्दी पहचान और उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है।”
स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी की व्यापक जागरूकता अभियान भी शुरू किया है, जिसमें स्कूलों, पंचायतों और सार्वजनिक स्थानों पर जानकारी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही संक्रमण की निगरानी के लिए विशेष टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं ताकि जल्दी से जल्दी मामले पहचाने और उपचार शुरू किया जा सके।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि समुदाय स्तर पर साफ़-सफ़ाई और जल स्रोतों की नियमित जांच अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, बच्चों के टीकाकरण और पोषण पर भी जोर देने की जरूरत है ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे को देखते हुए केरल सरकार ने कई अस्पतालों में अतिरिक्त संसाधन और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की है। यह कदम संक्रमण को नियंत्रित करने और प्रभावित परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अंततः, इस बीमारी से बचाव केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जागरूकता और सहयोग से संभव है। सतर्कता बरतें और संक्रमण के प्रसार को रोकने में अपना योगदान दें।

