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आइएलओ के आंकड़ों के अनुसार बड़ी नौकरी छंटनी नहीं, फिर भी एसेन में लाखों पर पड़ेगी एआई का प्रभाव
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इफ्तिखार मुफ्ती ने घटती अमरनाथ लिंगम पर चिंता जताई, पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर आगाह किया
Brook and Salt blow India away as England romp to series win
ब्रूक और साल्ट ने इंग्लैंड की शानदार जीत के साथ भारत को दी मात
‘Ikka’ movie review: Sunny Deol and Akshaye Khanna play an old hand with conviction
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Premier Energies commissions 5.6 GW solar module plant in Telangana under Rs 12,500 crore capex plan
प्रधान ऊर्जा ने तेलंगाना में 12,500 करोड़ रुपये की निवेश योजना के तहत 5.6 गीगावाट सौर मॉड्यूल संयंत्र का उद्घाटन किया
U.S. cyber agency is using Anthropic's Mythos to audit government code, sources say
अमेरिकी साइबर एजेंसी ने सरकारी कोड ऑडिट के लिए अपनाया Anthropic का Mythos: सूत्रों की पुष्टि
Meta to put AI chip into production in September as it looks to double computing capacity, memo shows
मेमो में खुलासा: मेटा सितंबर में एआई चिप का उत्पादन शुरू कर कंप्यूटिंग क्षमता दोगुनी करने की तैयारी
Manish Malhotra debuts at Paris Haute Couture Week with 'Maa' collection
मनिश मल्होत्रा ने पेरिस ह Haute Couture वीक में ‘मां’ संग्रह के साथ किया डेब्यू
Meta engineers interact with students on AI, emerging technologies at Shetty Institute of Technology in Kalaburagi
मेटा के इंजीनियरों ने शेट्टी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कलाबुरगी में छात्रों के साथ एआई और उभरती तकनीकों पर संवाद किया
The quantum computing age will only begin when we silence the noise

क्वांटम कंप्यूटिंग का युग आने वाला है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता तब तक संभव नहीं हो पाएगी जब तक हम क्वांटम सिस्टम के भीतर मौजूद शोर (noise) को नियंत्रित या समाप्त नहीं करते। विशेषज्ञों ने यह बात हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन में कही, जहां क्वांटम कंप्यूटरों के तकनीकी विकास और उनके व्यावहारिक उपयोगों पर चर्चा की गई।

पारंपरिक कंप्यूटर से अलग, क्वांटम कंप्यूटर क्वांटम बिट्स या क्यूबिट्स का उपयोग करते हैं, जो सुपरपोजीशन और एंटैंगलमेंट जैसे क्वांटम सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। हालांकि, क्वांटम सिस्टम शोर की वजह से संवेदनशील होते हैं, जो उनके प्रदर्शन और परिणामों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।

क्वांटम तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. अनुराग शर्मा के अनुसार, “जब तक हम इस शोर को प्रभावी तरीकों से कम नहीं कर पाते या उसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाते, तब तक क्वांटम कंप्यूटिंग का युग वास्तविक रूप से शुरू नहीं हो सकता।” उन्होंने बताया कि आज की क्वांटम मशीनों में त्रुटि दर बहुत उच्च है और वे पर्यावरणीय हस्तक्षेप, तापमान बदलाव और बाहरी विद्युत चुम्बकीय प्रभावों से प्रभावित होती हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिक कई स्तरों पर काम कर रहे हैं। इनमें बेहतर क्वांटम एरर करेक्शन तकनीक, अधिक स्थिर क्वांटम सामग्री विकसित करना और क्वांटम डेकोहेरेंस को कम करने के लिए उन्नत प्रयोगशाला सेटअप शामिल हैं। अमेरिका, चीन और यूरोप के प्रमुख शोध केंद्र इस दिशा में अग्रसर हैं।

क्वांटम कंप्यूटरों के सफल विकास और बड़े पैमाने पर उपयोग से भविष्य में गणना, डेटा सुरक्षा, दवा डिजाइन और जलवायु मॉडलिंग जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। हालांकि इस लक्ष्य को पाने के लिए शोर को समाप्त करने की चुनौती को पार करना अनिवार्य है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान शोध और तकनीकी प्रगति से पता चलता है कि कुछ वर्षों में शोर की समस्या पर नियंत्रण संभव हो सकता है, जिससे क्वांटम कंप्यूटिंग का युग नई उचाइयों को छू सकेगा। तब जाकर यह तकनीक व्यावसायिक और वैज्ञानिक दोनों क्षेत्रों में व्यापक रूप से व्यवहार में आएगी।

इस प्रकार, क्वांटम कंप्यूटिंग के भविष्य की सफलता सीधे तौर पर शोर को कम करने और नियंत्रण में लाने की क्षमता पर निर्भर करती है। यह तकनीक जितनी अधिक विश्वसनीय होगी, उतना ही जल्दी हम इसके लाभ उठा पाएंगे और यह युग चालू होगा।

अतः, वैज्ञानिक समुदाय की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए, वे नई पीढ़ी की क्वांटम टेक्नोलॉजी विकसित करने में पूरी मेहनत कर रहे हैं ताकि एक नई क्रांति की शुरुआत हो सके जो मानवता के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होगी।

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