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Why hackathons teach more than classrooms
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'Endometriosis tests would have given me years back'
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निर्देशक और लेखक आकाश बास्करन की नई फिल्म ‘इधायम मुरली’ में प्रेम के अनकहे भावों को समझने की सुविचारित कोशिश नजर आती है, लेकिन कहानी उतनी प्रभावशाली नहीं लगती। यह फिल्म युवावस्था के जटिल भावनाओं को दर्शाने वाला एक श्वासार्द्र और हल्का-फुल्का ड्रामा है, जिसमें युवा पात्रों की भावनाएं प्रमुख रूप से सामने लाई गई हैं।

फिल्म की कहानी मुख्य रूप से उन भावनाओं पर केंद्रित है, जो अक्सर शब्दों में बयां नहीं होतीं; जैसे कि छिपा हुआ प्यार, अनकहे सपने और समझ के पल। हालांकि, निर्देशक का प्रयास सराहनीय है, लेकिन संवाद और पटकथा के स्तर पर कुछ कमजोर कड़ियां देखने को मिलती हैं, जो कहानी की गहराई में बाधा डालती हैं।

अथर्वा और उनकी टीम के अभिनय में एक युवा और ताजगी भरा जलवा देखने को मिलता है। उनकी संवेदनशील अभिव्यक्ति दर्शकों को पात्रों के करीब ले जाती है। इसके बावजूद, फिल्म के अन्य पहलुओं में जैसे पटकथा की कमी, चरित्रों का अधूरापन और कहानी का कहीं-कहीं कमजोर विकास फिल्म के प्रभाव को कम करता है।

फिल्म की छायांकन और संगीत ने कहानी के भावनात्मक पहलुओं को अच्छी तरह से क्रियान्वित किया है। हल्की-फुल्की कथा के बीच ये पहलू दर्शकों को बांध कर रखते हैं। हालांकि, दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कहानी के साथ और प्रभावी काम की आवश्यकता थी।

यदि आप साल्ट की ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो भावनाओं को सहजता से दर्शाएं, तो ‘इधायम मुरली’ आपके लिए देखी जा सकती है। फिल्म ने युवाओं के मनोभावों को स्क्रीन पर उतारने का प्रयास किया है, लेकिन एक संपूर्ण और संतुलित कहानी के अभाव में यह पूरी तरह प्रभावी नहीं बन पाती।

निष्कर्षतः, ‘इधायम मुरली’ एक साधारण लेकिन ताजा अनुभव देती है, जो प्रेम की जटिलताओं को छूने की कोशिश करती है, परंतु कहानी की गहराई और समग्र प्रस्तुति के मामले में कहीं-कहीं कम पड़ जाती है।

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