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Goa govt to reclassify 1 crore sq metres of eco-sensitive land as no-development zones

गोवा: टाउन एंड कंट्री प्लानिंग बोर्ड ने इस सप्ताह की शुरुआत में हुई बैठक में उत्तर गोवा के चोपदेाम, अरंबोल और मंद्रेम में 15 लाख वर्ग मीटर भूमि को निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है। यह कदम पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है।

हाल ही में हुई इस बैठक में बोर्ड ने व्यापक रूप से 1 करोड़ वर्ग मीटर पर्यावरणीय संवेदनशील भूमि को नो-डेवलपमेंट जोन के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने की योजना को भी मंजूरी दी। इस निर्णय का मकसद प्राकृतिक आवासों, वनस्पतियों और जलसंवर्धन क्षेत्रों को नुकसान से बचाना है।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग बोर्ड के चेयरमैन ने बताया कि गोवा की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता संरक्षित रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और अवैध अतिक्रमण तथा अयोग्य निर्माण पर अंकुश लगेगा।

वहीं स्थानीय पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे गोवा की पर्यावरणीय नीति में एक महत्वपूर्ण सुधार करार दिया है। उनका मानना है कि इससे समुद्र तट और जंगलों की हानि पर रोक लगेगी और समग्र पारिस्थितिकी तंत्र स्थिर रहेगा।

इस पुनर्वर्गीकरण के तहत जितनी भूमि निषेध क्षेत्र घोषित होगी, वहां किसी भी प्रकार की भूमि-संरचनात्मक विकासात्मक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार इस दिशा में निगरानी और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

विशेषज्ञों के अनुसार, गोवा में पर्यावरणीय संरक्षण की दिशा में यह बड़ा कदम है जो भविष्य में सतत विकास के लिए आधार तैयार करेगा। सरकार की यह पहल पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित करेगी।

बोर्ड की अगली बैठक में इस विषय पर और विस्तार से चर्चा कर और क्षेत्रों को भी शामिल करने की संभावना है। इसके साथ ही, सरकारी एजेंसियां और नागरिक समाज मिलकर कठोर निरीक्षण और संरक्षण कार्यों में जुटेंगे।

इस प्रकार, गोवा सरकार की यह नीति न केवल पर्यावरण के प्रति जवाबदेही दर्शाती है, बल्कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास भी है।

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