नई दिल्ली: विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के प्रमुख विटोल्ड बांका ने भारत की डोपिंग समस्या को गंभीर बताया है, लेकिन साथ ही उन्होंने इस क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे ईमानदार प्रयासों की भी प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि मजबूत परीक्षण, शिक्षा और कड़ी प्रवर्तन के बिना खेलों में साफ-सुथरी प्रतियोगिता संभव नहीं है, खासकर तब जब भारत आगामी ओलंपिक और अन्य बड़े वैश्विक खेल आयोजन की मेजबानी की तैयारी कर रहा है।
बांका ने जोर देकर कहा कि डोपिंग नियंत्रण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और खेल की ईमानदारी बनी रहे। उन्होंने कहा, “भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने डोपिंग परीक्षण संसाधनों को और अधिक मजबूत करे, साथ ही खिलाड़ियों और कोचों के लिए व्यापक शिक्षण कार्यक्रम चलाए।”
अधिकारियों ने बताया कि WADA हर संभव मदद के लिए तैयार है, ताकि भारत में बेहतर निरीक्षण तंत्र स्थापित किया जा सके। बांका के अनुसार, डोपिंग रोधी नियमों को सख्ती से लागू करना, और违规 गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक है। इसके लिए निगरानी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है।
भारत पिछले कुछ वर्षों से खेल क्षेत्र में अपने स्तर को ऊंचा करने में लगा हुआ है। लेकिन डोपिंग के मामलों ने देश की प्रतिष्ठा को चुनौती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर शोध, आधुनिक उपकरण और जागरूकता अभियानों के जरिये भारत विश्व स्तर पर अपनी छवि को सुधार सकता है।
विटोल्ड बांका ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में भारत को अपनी जिम्मेवारी का एहसास करते हुए मजबूत कदम उठाने होंगे। खेलों में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सभी हितधारकों का सहयोग आवश्यक है।” उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक खेलों के आयोजन के दौरान कड़े नियम लागू किए जाएंगे जिससे कोई भी खिलाड़ी या टीम किसी भी प्रकार के डोपिंग विवाद में न फंसे।
सरकार और खेल संघों को भी इस दिशा में सक्रिय होकर नीतिगत सुधार तथा संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना होगा। भारत की महत्वाकांक्षा है कि वह एक बेहतर एवं स्वच्छ खेल परिवेश प्रदान करे, जिससे खिलाड़ी न केवल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें, बल्कि खेलों की विश्वसनीयता भी बनी रहे।
इस दिशा में WADA सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से भारत की भूमिका और जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी, विशेष रूप से जब विश्व के सबसे बड़े खेल आयोजन यहां आयोजित होंगे।

