हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा कि राज्य सरकार पेंशन के लिए 62.47 लाख लाभार्थियों को प्रति वर्ष ₹33,000 करोड़ से अधिक राशि खर्च कर रही है। इसके अलावा, असंगठित क्षेत्र के लगभग 88 लाख श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार ₹615 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी खर्च कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सामाजिक सुरक्षा और गरीब वर्ग के आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करना है। पेंशन योजनाओं के तहत वृद्ध, विधवा एवं दिव्यांगजनों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
उनका कहना था कि असंगठित श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए विशेष योजना बनाई गई है। इसमें उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा के उपाय शामिल हैं, ताकि वे भी सामाजिक सुरक्षा की पारंपरिक योजनाओं से जुड़े रह सकें।
सरकार विभिन्न कल्याण योजनाओं जैसे बीमा, स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा सहायता के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के जीवन स्तर को सुधारने का निरंतर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी सरकार ऐसे ही कदम उठाती रहेगी ताकि अधिक से अधिक गरीब और कमजोर वर्गों तक सहायता पहुंच सके।
इन पहलों के माध्यम से न केवल आर्थिक मदद मिल रही है, बल्कि सामाजिक समरसता भी बढ़ रही है। राज्य सरकार का कहना है कि योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी और बेहतर व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि हर नागरिक को उनकी हिस्सेदारी मिले और वे सम्मान के साथ जीवनयापन कर सकें। पेंशन और कल्याण योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।”
राज्य के मजदूर वर्ग, खासकर असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिक, हमेशा सरकार की योजनाओं के केंद्र में रहे हैं। इस प्रयास में, सरकार ने व्यापक स्तर पर संवाद और जागरूकता अभियान भी शुरू किए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग सेवाओं का लाभ उठा सकें।
इस प्रकार, आंध्र प्रदेश सरकार की पेंशन और कल्याण योजनाएं राज्य के गरीब और कमजोर वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा के मजबूत स्तंभ के रूप में कार्य कर रही हैं।

