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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
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Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
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It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
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बैंगलोर में कोविड-19 की कोरोना सूचकांक निगरानी के लिए सार्वजनिक परीक्षणों में कमी के बावजूद अपशिष्ट जल से जुटाए गए डेटा ने छिपे हुए संक्रमण की लहरें उजागर की हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खोज महामारी की ऊंची लहरों के बाद जांच की तीव्रता कम होने पर भी वायरस के फैलाव की निगरानी के लिए बहुआयामी निगरानी प्रणाली बनाए रखने का महत्व स्पष्ट करती है।

शहर में कोविड परीक्षणों में गिरावट के बीच वायरल लोड की निगरानी के लिए अपशिष्ट जल की नियमित जांच एक अहम उपकरण के रूप में उभरा है। विशेषज्ञों ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों के लिए यह डेटा संक्रमण के रुझानों की सटीक जानकारी देता है, खासकर जब संक्रमण के मामले कम दिखते हों।

डॉक्टर अनिल कुमार, जो महामारी विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय हैं, ने कहा, “जब सार्वजनिक परीक्षण में गिरावट आती है, तब अपशिष्ट जल निगरानी जैसे वैकल्पिक तरीकों से हमें वास्तविक संक्रमण के स्तर का पता चलता है। इससे स्वास्थ्य विभाग को समय रहते आवश्यक कदम उठाने में सहायता मिलती है।”

शोध में यह भी बताया गया कि कोविड संक्रमण की लहरें अक्सर परीक्षण संख्या में गिरावट के कारण छिपी रह जाती हैं, जिससे संक्रमण के नए मामले सार्वजनिक आंकड़ों में दिखाई नहीं देते। ऐसे में सिर्फ एक निगरानी प्रणाली पर निर्भर रहना जोखिम भरा सिद्ध हो सकता है।

शामिल अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि डेटा का संयोजन – जैसे सार्वजनिक परीक्षण, अपशिष्ट जल निगरानी, अस्पताल में भर्ती आंकड़े – प्रभावी महामारी नियंत्रण के लिए आवश्यक है। विशेषज्ञों का मत है कि एकीकृत निगरानी तंत्र न केवल संक्रमण की पूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है, बल्कि संसाधनों के बेहतर प्रयोग और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी भी सुनिश्चित करता है।

बैंगलोर के स्वास्थ्य विभाग ने वर्तमान शोध को स्वीकार किया है और भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में सुधार के लिए अपशिष्ट जल निगरानी को नियमित और व्यापक रूप से लागू करने की योजना बनाई है। साथ ही, जनता को जागरूक करना और परीक्षण अभियान को प्रोत्साहित करना भी उनकी प्राथमिकता रहेगी।

इस अध्ययन के निष्कर्ष महामारी के इस चरण में भी सतर्कता की आवश्यकता और बहु-आयामी निगरानी की भूमिका को दर्शाते हैं, ताकि कोविड-19 जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटना प्रभावी ढंग से संभव हो सके।

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