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As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
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Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
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It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
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Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
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₹700 cr worth of underworld don Dawood associate Iqbal Mirchi’s assets attached by ED

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ₹700 करोड़ से अधिक की संपत्ति ज़ब्त की है, जो अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सहयोगी इकबाल मिर्ची से जुड़ी हुई मानी जा रही है। यह कार्रवाई 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले में मिर्ची के संलिप्तता के संदर्भ में की गई है।

इकबाल मिर्ची लंबे समय से भारत की कानूनी एजेंसियों से बचते हुए लंदन में रह रहे थे। वे 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल थे, जहां 250 से अधिक लोग मारे गए थे और हजारों लोग घायल हुए थे। मिर्ची की संपत्ति के खिलाफ यह कार्रवाई एक बड़ी कानूनी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि इससे अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर पैनी नजर लगाने तथा उन्हें ज़ब्त करने का संदेश जाता है।

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि मिर्ची की यह संपत्ति विभिन्न प्रॉपर्टी फर्मों, फिक्स्ड डिपॉजिट्स और अन्य निवेशों के माध्यम से छुपाई गई थी। ईडी द्वारा की गई छापेमारी और गहन जांच में यह तथ्य सामने आए कि इन संपत्तियों की खरीद-फ़रोख्त के पीछे मिर्ची और उनके सहयोगियों का नेटवर्क है।

1993 के मुंबई ब्लास्ट के बाद से ही इकबाल मिर्ची को भारत सरकार ने कई मामलों में उनके खिलाफ वांछित किया है। लंदन में मौजूदगी के कारण भारत की एजेंसियों के लिए मिर्ची पर कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण रहा है। तथापि, हालिया सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मिर्ची की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने में सफलता मिली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई दाऊद इब्राहिम और उनके अपराध नेटवर्क के खिलाफ भारत की कड़ी कार्रवाई का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद और संगठित अपराध को रोकना है। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी यह भी कहते हैं कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी करके संपत्तियां ज़ब्त करना और उनसे जुड़ी गुप्त जानकारी जुटाना आवश्यक होता है ताकि अपराध नियंत्रण में सहायता मिल सके।

सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें, जिससे इस तरह के अपराधी नेटवर्क को कमजोर किया जा सके।

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