पश्चिम एशिया में युद्ध और हॉर्मुज की खाड़ी की समुद्री मार्ग की नाकाबंदी के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने भारत के ईंधन संकट को और गहरा दिया है। सरकार ने चार वर्षों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है, साथ ही सीएनजी की कीमतें भी बढ़ाई गई हैं। यह एक संकेत है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा कितनी नाजुक है और बाहरी संकटों से कितनी प्रभावित होती है।
इस समय देश के सामने ऊर्जा विकल्पों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। विशेष रूप से, यह सवाल उठता है कि क्या कोई ऐसा ईंधन मौजूद है जो हम तक पहुँचने के लिए जमी हुई है और जो कई जटिलताओं का समाधान कर सकता है। इस संदर्भ में बायोगैस एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है।
बायोगैस एक नवीनीकृत ऊर्जा स्रोत है, जो जैविक अपशिष्टों से निर्मित होता है। यह न केवल पर्यावरण हितैषी है बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी किफायती साबित हो सकता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बायोगैस उत्पादन से ईंधन की निर्भरता कम की जा सकती है, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी। भारत में किसानों द्वारा कूड़ा-कचरे और कृषि अवशेषों का उपयोग करके बायोगैस उत्पादन में वृद्धि हो रही है, जो आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से लाभकारी है।
सरकार भी बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के जरिए किसानों और छोटे उद्योगों को तकनीकी सहायता एवं अनुदान दिया जा रहा है ताकि बायोगैस plantas स्थापित करने में मदद मिले। इसके अलावा, बायोगैस से उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग घरेलू रसोई गैस, कृषि उपकरण और परिवहन के लिए भी किया जा सकता है।
हालांकि, बायोगैस को पूरी तरह अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र में समाहित करने के लिए आवश्यक है कि बुनियादी ढांचे, तकनीकी ज्ञान और निवेश को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही, जन जागरूकता बढ़ाकर इसके लाभों को व्यापक स्तर पर फैलाना जरूरी होगा।
अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि वर्तमान ऊर्जा संकट के समय में बायोगैस एक संभावित समाधान के रूप में उभर रहा है। यह न केवल ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा कर सकता है, बल्कि भारत के ऊर्जा आयात पर निर्भरता को भी कम कर सकता है। हमें इस विकल्प को पहचानना होगा और इसे विकसित करने में योगदान देना होगा ताकि स्थायी और स्वदेशी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
