नई दिल्ली। एक ऑस्कर नामांकित फिल्म, जो गाजा में इजरायली सेना द्वारा पांच साल की एक फिलिस्तीनी बच्ची की हत्या पर आधारित है, पहले भारतीय सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा नामंजूर कर दी गई थी। इसका कारण यह था कि बोर्ड को डर था कि इस फिल्म के रिलीज होने से भारत और इजरायल के बीच संबंधों को नुकसान पहुंच सकता है।
मगर अब विशेष जानकारी के अनुसार, इस फिल्म को आखिरकार ‘ए’ सर्टिफिकेट दिया गया है, जिससे यह फिल्मों के केवल वयस्क दर्शकों के लिए मान्य हो जाती है। इससे फिल्म की रिलीज़ की राह आसान हो गई है।
CBFC के अधिकारियों ने बताया कि फिल्म की संवेदनशीलता को समझते हुए वे इसे सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद सर्टिफिकेट दे रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चर्चाएं और राजनीतिक दबाव के कारण फिल्म को शुरू में अस्वीकार किया गया था, परंतु न्यायिक एवं समीक्षात्मक प्रक्रिया से गुजरने के बाद इसे मंजूरी मिल गई।
फिल्म की कहानी गाजा पट्टी के एक छोटे से शहर में रहने वाली पांच वर्षीय लड़की की है, जो बच्चों और निर्दोष नागरिकों पर हो रही हिंसा और सैन्य अभियान का साक्षी बनती है। फिल्म ने विश्वभर में युद्ध के दुष्परिणामों को उजागर किया है और मानवीय दृष्टिकोण से इस संवेदनशील विषय को उठाया है।
भारत में इस तरह की राजनीतिक और सामाजिक विवादास्पद फिल्मों के रिलीज को लेकर हमेशा गंभीर दृष्टिकोण रखा जाता है, खासकर तब जब वे देश के विदेश संबंधों को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन स्वतंत्र फिल्मांकन और अभिव्यक्ति की आज़ादी को भी महत्व दिया जाता है।
फिल्म निर्देशक ने एक बयान में कहा कि उनका उद्देश्य केवल सत्य और मानवता की कहानी बताना था, न कि किसी राजनयिक तनाव को उत्पन्न करना। उन्होंने कहा, “हम खुश हैं कि पिछले प्रतिबंध के बाद हमारा प्रयास साकार हुआ। हमें उम्मीद है कि दर्शक इसे एक संवेदनशील एवं जरूरी फिल्म के रूप में स्वीकार करेंगे।”
विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसी फिल्मों से न केवल कला को समर्थन मिलता है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने में मदद मिलती है। वे कहते हैं कि राजनीतिक दबाव होते हुए भी महसूस होता है कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी को बनाए रखना आवश्यक है।
फिल्म की रिलीज से पहले अब कई स्क्रीनिंग्स और चर्चा सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों को इस गंभीर मुद्दे की गहराई समझाने में मदद मिल सके।
इस फ़िल्म की कहानी और इसके इरादों को लेकर देशभर के फिल्म प्रेमी, आलोचक और सामाजिक कार्यकर्ता काफी उत्साहित हैं और इसका स्वागत कर रहे हैं। यह फिल्म ना केवल एक कहानी है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और न्याय के लिए एक पुकार भी है।

