भारत में एलपीजी की खपत लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही अक्सर गैस की किल्लत और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां सामने आती रहती हैं। ऐसे समय में पुणे के एक जलवायु उद्यमी, प्रियांदर्शन सहस्रबुद्धे, ने एक अभिनव पहल की है जो घरेलू और व्यावसायिक स्तर पर पर्यावरण और ऊर्जा दोनों के लिए एक नई राह खोल रही है।
प्रियांदर्शन सहस्रबुद्धे पुणे आधारित एक क्लाइमेट एंटरप्रेन्योर हैं जो खाद्य अपशिष्ट को साफ-सुथरे खाना पकाने वाले ईंधन में बदलने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। उनका तरीका है – कॉम्पैक्ट बायोगैस सिस्टम की मदद से घरों, अपार्टमेंट सोसाइटियों और व्यवसायों में इस अपशिष्ट को बायोगैस में परिवर्तित करना।
भारत में प्रति वर्ष कई टन खाद्य और रसोई अपशिष्ट फेंका जाता है, जो न केवल गंदगी फैलाता है बल्कि पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। सहस्रबुद्धे के बायोगैस सिस्टम से इस कचरे का उपयोग न केवल पर्यावरण हितैषी तरीके से होता है, बल्कि इससे निर्मित गैस एलपीजी का सस्ता और स्वच्छ विकल्प भी प्रस्तुत करती है।
प्रियांदर्शन कहते हैं, “हमारा मुख्य उद्देश्य है कि हम लोकल स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करें और लोगों के लिए सुलभ, स्वच्छ, और किफायती ईंधन का विकल्प प्रस्तुत करें। हमारी प्रणाली इतने कॉम्पैक्ट हैं कि ये शहरी और ग्रामीण दोनों जगहों पर आसानी से स्थापित की जा सकती हैं।”
इस बायोगैस तकनीक में, खाद्य अपशिष्ट को एक विशेष डाइजेस्टर में रखा जाता है जहां सूक्ष्मजीवों द्वारा यह अपशिष्ट प्राकृतिक तरीके से पचाया जाता है और बायोगैस उत्पन्न होती है। यह गैस मुख्य रूप से मीथेन होती है जिसका उपयोग खाना पकाने के लिए एकदम उपयुक्त होता है।
विभिन्न सोसाइटीज और छोटे व्यवसाय अभी इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिससे उनकी गैस की लागत में कटौती हो रही है और साथ ही प्रदूषण में कमी आ रही है। सरकारी और निजी निकायों से भी इस तरह की पहलों को बढ़ावा मिल रहा है, ताकि स्वच्छ ऊर्जा के नए समाधान देश भर के घरों तक पहुंच सकें।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय ऊर्जा बाजार में जब एलपीजी की किल्लत और बढ़ती कीमतें लोगों को परेशान कर रही हैं, तब प्रियांदर्शन जैसे नवाचारी उद्यमी इस चुनौती का प्रभावी सामाधान लेकर आ रहे हैं। घरेलू कचरे से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में यह कदम न केवल पर्यावरण की सुरक्षा करता है, बल्कि घरेलू ऊर्जा लागत को भी कम करता है।
आने वाले समय में ऐसी तकनीकों का देश के ऊर्जा नियोजन में महत्वपूर्ण स्थान होगा, और पुणे के इस स्टार्टअप की पहल अन्य शहरों और राज्यों के लिए उदाहरण स्थापित करेगी। ऊर्जा की बचत और प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह एक प्रेरणादायक प्रयास है जो समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।

