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नई दिल्ली। भारत के कई शहरों में यूवी सूचकांक (Ultraviolet Index) में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों और त्वचा विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है। इस बढ़ते यूवी स्तर के कारण त्वचा संबंधी कई समस्याएं आम हो रही हैं, जिनमें पिग्मेंटेशन, त्वचा का काला पड़ना (टैनिंग) और समय से पहले त्वचा का उम्र बढ़ना प्रमुख हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में औसत से अधिक तीव्रता वाले सूर्य के प्रकाश के कारण लोगों को अपने रोजाना की त्वचा सुरक्षा की आदतें बदलनी होंगी। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरा खान ने कहा, “हमारे देश में सनस्क्रीन के विकल्प अब पहले से अधिक आवश्यक हो गए हैं। लोग केवल चेहरे के लिए ही नहीं, पूरे शरीर के लिए ऐसे उत्पाद खोज रहे हैं जो भारतीय जलवायु और त्वचा के प्रकार के अनुसार अनुकूल हों।”

डॉ. खान ने आगे बताया कि पिछले कुछ वर्षों में टैनिंग और पिग्मेंटेशन के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। “कारण यह है कि लोग अक्सर सनस्क्रीन लगाने में लापरवाही करते हैं अथवा गलत प्रकार के सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं, जो प्रभावी नहीं होते।”

यूवी स्तर में इस बढ़ोतरी के कारण बाजार में सनस्क्रीन उत्पादों की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है। वैश्विक ब्रांड सातत्य से नई तकनीकों और फॉर्मूलेशन के साथ बाजार में उतर रहे हैं, वहीं घरेलू कंपनियां भी भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों और जलवायु को ध्यान में रखते हुए विशिष्ट उत्पाद विकसित कर रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावी सनस्क्रीन चुनते समय एसपीएफ (Sun Protection Factor), पीए (Protection Grade of UVA) रेटिंग, त्वचा के प्रकार के अनुसार उपयुक्तता और उत्पाद में मौजूद रासायनिक व खनिज अवयवों पर ध्यान देना जरूरी है। यह भी जरूरी है कि सनस्क्रीन को नियमित रूप से दोहराया जाए, खासकर धूप में लंबा समय बिताने के दौरान।

सरकारी संस्थान और स्वास्थ्य विभाग भी आम जनता को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं ताकि लोग धूप के हानिकारक प्रभावों से बच सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि सनस्क्रीन का सही और समय पर इस्तेमाल ही त्वचा को यूवी-किरणों से बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।

समाप्त करते हुए, यह स्पष्ट है कि भारत में बढ़ते यूवी स्तर को देखते हुए सनस्क्रीन बाजार और उपभोक्ता दोनों को इस नई चुनौती के अनुरूप बदलाव करना होगा। केवल उत्पादों का विकास ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता भी जरूरी है ताकि वे त्वचा संरक्षण के लिए सही कदम उठा सकें।

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