Headline
G7 leaders tackle reliance on China for critical minerals
G7 नेता चीन पर निर्भरता कम करने के लिए समावेशी रणनीति पर विचार कर रहे हैं
Ageing population and rising debt could push Tamil Nadu towards a fiscal trap, says White Paper
बढ़ती उम्रदराज आबादी और बढ़ता ऋण तामिलनाडु को आर्थिक जाल में फंसाने का खतरा: व्हाइट पेपर
Heatwaves and ozone together increase India’s cardiac deaths: study
भारत में गर्मी की लहर और ओजोन के कारण हृदय रोग से मौतों में वृद्धि: अध्ययन
‘Shrek 5’ trailer: Shrek and Donkey reunite for a new adventure
शेरेक 5 ट्रेलर: शेरेक और डंकी फिर साथ नए रोमांच के लिए
Hindu prayers made mandatory in Chhattisgarh’s State schools; govt imposing RSS agenda, says Congress
छत्तीसगढ़ के राज्य विद्यालयों में हिंदू प्रार्थनाएँ अनिवार्य; कांग्रेस ने कहा- सरकार आरएसएस एजेंडा लागू कर रही है
Glenmorangie’s single malt Scotch whisky, Lasanta, arrives in Kolkata
ग्लेनमोरांगी का सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की, लसांता, कोलकाता में लॉन्च
Stock markets extend rally in early trade on drop in crude oil prices
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ स्टॉक मार्केट में तेजी जारी
Hoarding row erupts ahead of Rahul Gandhi’s Kota event, Gehlot alleges BJP ‘fear’
राहुल गांधी के कोटा कार्यक्रम से पहले होर्डिंग विवाद, गहलोत ने भाजपा पर ‘डर’ का आरोप लगाया
Recovery of Ebola patients offers rare moments of joy at epicentre of outbreak
इबोला मरीजों के ठीक होने से महामारी के केंद्र में मिल रहे हैं खुशी के अनमोल पल
Lack of privacy, toilets, persistent stigma force girls in Odisha to miss school during menstruation

ओडिशा में लड़कियों की शिक्षा में माहवारी के दौरान आने वाली बाधाएं एक गंभीर समाजिक मुद्दे के रूप में उभर रही हैं। हाल ही में एक सर्वेक्षण में पाया गया कि जुलाई 2023 तक लगभग 94% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था मौजूद है, फिर भी मासिक धर्म से संबंधित सुविधाओं की कमी फिर भी लड़कियों की स्कूल उपस्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।

सर्वेक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि स्कूलों में आवश्यक स्वच्छता उपकरण जैसे पानी, साबुन की अनुपलब्धता और उचित मासिक धर्म प्रबंधन के साधनों की कमी मुख्य कारण हैं, जिनके कारण कई छात्राएं अपने मासिक धर्म के दौरान स्कूल नहीं जा पाती हैं। इस स्थिति से न केवल उनकी शिक्षा प्रभावित होती है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सम्मान पर भी बुरा असर डालता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लड़कियों को मासिक धर्म के समय आवश्यक सुविधाएं और संवेदनशीलता प्रदान करना न केवल उनकी शिक्षा में सुधार करेगा, बल्कि समाज में माहवारी पर छाए हुए टाबू को भी कम करेगा। शिक्षा विभाग ने भी इस दिशा में सुधार के लिए कई कदम उठाने की बात कही है, जिसमें स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाना और छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।

इसके अलावा, स्थानीय सरकारी अधिकारियों और एनजीओ की ओर से भी मासिक धर्म के दौरान लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्य योजनाएं बनायी जा रही हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि स्कूलों में नियमित स्वच्छता निरीक्षण और छात्राओं को उचित जानकारी एवं सहायता प्रदान करना अनिवार्य होना चाहिए।

माहवारी के समय लड़कियों का स्कूल छोड़ने का यह पैटर्न न केवल उनकी पढ़ाई में बाधक है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए भी खतरनाक है। समाज को इस समस्या से निपटने के लिए संगठित प्रयास करने होंगे और लड़कियों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना होगा। तभी लड़कियां बिना किसी डर या हिचक के अपनी शिक्षा पूरी कर सकती हैं और समाज में समान रूप से भागीदारी कर सकती हैं।

Source