कोच्चि, केरल। कॉमेडियन सजीश कुट्टनल्लूर द्वारा स्थापित एक अनूठा समुदाय अब विश्व स्तर पर पहचान बना चुका है। यह समुदाय दुनिया के 40 देशों के गंजा पुरुषों को एक साथ लाता है और उनके लिए कई सामाजिक पहल और वकालत करता है।
इस वैश्विक संगठन का उद्देश्य गंजापन को समाज में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य बनाना है। गंजे पुरुषों के लिए एक सकारात्मक मंच प्रदान करना और उनके अनुभवों को साझा करना इस पहल के मूल आधार हैं। समुदाय ने न केवल सामाजिक रूप से लोगों को जोड़ने का कार्य किया है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-स्वीकृति और सौंदर्य मानदंडों से जुड़ी चुनौतियों को समझने तथा उन्हें दूर करने के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
सजीश कुट्टनल्लूर ने इस समूह की शुरुआत कॉमेडी से प्रेरित होकर की थी, जहां उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को हंसी-मज़ाक के माध्यम से साझा किया। धीरे-धीरे यह पहल एक सशक्त आंदोलन बन गई जिसने 2,000 से अधिक सदस्यों को आकर्षित किया। ये सदस्य सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अन्य देशों से भी हैं।
समुदाय नियमित रूप से ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलन समारोह आयोजित करता है, जहां सदस्य अपने अनुभव साझा करते हैं और एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। साथ ही, सामाजिक जागरूकता अभियानों के जरिए गंजे पुरुषों के खिलाफ होने वाले पूर्वाग्रह और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई जाती है। यह पहल युवा पीढ़ी के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक साबित हो रही है, जो अपने रूप-रंग को लेकर असुरक्षा महसूस करते हैं।
उल्लेखनीय है कि इस तरह के प्लेटफॉर्म गंजे पुरुषों को अपनी त्वचा में आत्मविश्वास विकसित करने का अवसर देते हैं। साथ ही, यह समाज को यह संदेश भी देता है कि सौंदर्य के पैमानों को व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
सजीश कुट्टनल्लूर ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ गंजे पुरुषों को एकजुट करना नहीं है, बल्कि उन्हें यह एहसास कराना है कि वे अपने तरीके से खूबसूरत हैं। यह समुदाय भाईचारे और सकारात्मक सोच का प्रतीक बन चुका है।”
भारत सहित विश्व के अन्य देशों में इस तरह के सामाजिक समूहों के बढ़ते प्रभाव से यह स्पष्ट होता है कि विविधता और स्वीकार्यता की दिशा में समाज तेजी से प्रगति कर रहा है। आगे चलकर यह वैश्विक समुदाय और बड़े पैमाने पर अपने प्रभाव को फैलाने के प्रयास में लगा है।

