नई दिल्ली। भारत के वनस्पतिविज्ञान चित्रण की अनोखी दुनिया को समर्पित एक नई पुस्तक और प्रदर्शनी ‘पेपर गार्डन्स’ ने हाल ही में MAP (म्यूजियम ऑफ आर्ट एंड पोटेरिज़) में अपनी शुरुआत की है। यह आयोजन न केवल भारतीय वनस्पतियों की कलात्मक छवि प्रस्तुत करता है, बल्कि इनमें निहित उपनिवेशवादी इतिहास और कलाकारों के मेहनतनुमा परिश्रम को भी उजागर करता है।
पुस्तक और प्रदर्शनी दोनों में 18वीं से 20वीं सदी के बीच के बायोलॉजिकल चित्रों को संग्रहित किया गया है जो ब्रिटिश काल के दौरान भारत में बनाए गए थे। इन चित्रों में प्रजाति की वैज्ञानिक जानकारी के साथ-साथ उस दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का भी प्रतिबिंब देखने को मिलता है।
पाठकों और दर्शकों को इस आयोजन के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलता है कि कैसे वनस्पति चित्रण ने कला और विज्ञान के बीच एक सेतु का काम किया तथा उपनिवेशवादी प्रशासन के लिए क्या महत्त्वपूर्ण सूचना उपलब्ध कराई। इस प्रदर्शनी में शामिल चित्रकारों के नाम आज कम जाने जाते हैं, लेकिन उनकी मेहनत ने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है।
MAP की क्यूरेटर ने बताया, “पेपर गार्डन्स हमें एक ऐसे पहलू से रूबरू कराता है, जो अक्सर उपनिवेशवाद की कहानियों में छूट जाता है — यानि उन कलाकारों और वैज्ञानिकों की व्यक्तिगत मेहनत, जिनके जज़्बे से ये प्राचीन चित्र जीवित हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन न केवल कला व इतिहास के प्रति रुचि बढ़ाते हैं, बल्कि हमें भारत के उपनिवेशकालीन दौर की जटिल सामजिक-राजनैतिक परिस्थितियों को भी समझने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त, पुस्तक में चित्रों के अलावा संबंधित निबंध और शोध लेख भी शामिल हैं जो शोधकर्ताओं एवं सामान्य पाठकों दोनों के लिए उपयोगी साबित होंगे।
‘पेपर गार्डन्स’ प्रदर्शनी अगले तीन महीने तक MAP में आयोजित रहेगी और लोगों को आमंत्रित करती है कि वे इस अनूठी यात्रा में शामिल होकर भारत की वनस्पति कला और इतिहास की गहराई को समझें। यह आयोजन कला प्रेमियों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है जो कलात्मक काम के पीछे छुपे मानव और सामाजिक इतिहास को उजागर करता है।

