नई दिल्ली: आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक नए झटके का सामना करना पड़ा है, जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को न केवल राज्यसभा से अपने इस्तीफे की घोषणा की बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी। यह कदम पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष और राजनीतिक संकट को और गहरा करता दिख रहा है।
सुष्मिता देव के इस्तीफे के कुछ ही देर बाद वे दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मिलीं, जिससे उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। इस मिलन से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही दलों की राजनीतिक रणनीतियों पर असर पड़ने की संभावना है।
यह घटना ऐसे समय आई है जब तृणमूल कांग्रेस को पूर्वांचल के बाहर अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। इससे पहले 8 जून को वरिष्ठ तृणमूल नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा और पार्टी से एक साथ इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी की सार्वजनिक लोकप्रियता में गिरावट को कारण बताया था।
रॉय ने भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, औद्योगिक विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था में गिरावट जैसी कई गंभीर समस्याओं का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे की वजह बताई थी। उनकी यह आलोचना पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुई थी।
सुष्मिता देव असम के एक प्रभावशाली राजनेता के रूप में जानी जाती हैं और वे वरिष्ठ कांग्रेस नेता स्व. संतोष मोहन देव की बेटी हैं, जिन्होंने राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया।
अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से करने वाली सुष्मिता देव ने 2014 से 2019 तक असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद के रूप में सेवा की। वे 2019 में बीजेपी के राजदीप रॉय से चुनाव हार गईं। अगस्त 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर पार्टी के लिए नई उम्मीदें जगाईं।
ममता बनर्जी ने उन्हें प्रमुख रूप से पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम में पार्टी का विस्तार करने का जिम्मा दिया था। इसके तहत उन्होंने कई बार सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने अक्टूबर 2021 से अगस्त 2023 तक राज्यसभा में शोधकालीन अवधि हेतु काम किया और अप्रैल 2024 में फिर से चुनी गईं, लेकिन छह वर्ष की अवधि पूरी करने से पहले इस्तीफा दे दिया।
हालांकि उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे की विशेष वजहों का सार्वजनिक तौर पर खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनकी हिमंता सरमा से मुलाकात ने अगली राजनीतिक दिशा को लेकर विभिन्न अटकलें तेज कर दी हैं। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के सामने एक नए राजनीतिक संघर्ष के संकेत भी मिलने लगे हैं।
विशेष रूप से, यह घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है जब पार्टी कई उच्च पदस्थ नेताओं के अलग होने की चुनौती से जूझ रही है, जो पार्टी के लिए आने वाले दिनों को कई मायनों में चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
आईएएनएस की रिपोर्ट के साथ

