सोशल मीडिया की बुलंदियों पर चढ़ते ही बच्चों के स्किनकेयर उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ती प्रवृत्ति लड़कियों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्किनकेयर रूटीन और ब्यूटी टिप्स की बाढ़ आ गई है। युवती और किशोर इस ट्रेंड को अपनाते हुए अपने बचपन से ही स्किनकेयर उत्पादों का उपयोग करने लगे हैं। इससे मार्केट में बच्चों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए क्रीम, लोशन और अन्य स्किनकेयर उत्पादों की मांग बढ़ी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह व्यवहार चिंता का विषय है क्योंकि छोटे बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है और गलत उत्पादों या अत्यधिक उपयोग से त्वचा संबंधी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सीमा वर्मा के अनुसार, “अत्यधिक और बिना विशेषज्ञ की सलाह के स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल बच्चों की त्वचा के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। यह एलर्जी, ड्राईनेस, और अन्य त्वचा संबंधी विकारों का कारण बन सकता है।”
साथ ही, यह प्रवृत्ति मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. नीरज सक्सेना बताते हैं कि स्किनकेयर को लेकर बच्चों में असफलता का डर, आत्मसम्मान में गिरावट और शरीर की छवि को लेकर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। यह स्थिति किशोरावस्था में चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सोशल मीडिया पर दिखावे के लिए बढ़े झुकाव के कारण बच्चे अपनी त्वचा के प्राकृतिक रंग और बनावट से संतुष्ट नहीं रह पाते हैं। वे बार-बार नयी-नयी प्रोडक्ट्स और रूटीन अपनाने लगते हैं जो उनकी त्वचा के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।
सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियां और स्कूल भी इस विषय पर जागरूकता फैलाने की जरूरत पर बल दे रहे हैं। उन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित स्किनकेयर किट्स बनाने और सही जानकारी देने की सख्त जरूरत है। पैरेंट्स को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को सही मायनों में प्राकृतिक सुंदरता और स्वास्थ्य के महत्व को समझाएं।
इस बढ़ते चलन के चलते बाजार में आने वाले नए-नए स्किनकेयर उत्पादों के पौष्टिक और सुरक्षित होने की पुष्टियाँ कराना आवश्यक है, ताकि बच्चों की त्वचा सुरक्षित बनी रहे और वे मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहें।
संक्षेप में कहा जाए तो, सोशल मीडिया के प्रभाव से बच्चों के लिए स्किनकेयर बाजार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव लड़कियों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, जिसके लिए सबका संयुक्त प्रयास आवश्यक होगा।

