नई दिल्ली: भारत के कच्चे तेल के आयात में मई महीने में ज़ोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। क्रूड रिफाइनर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CREA) के अनुसार, देश के कुल कच्चे तेल के आयात में मई में महीने-दर-महीने 8% की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण रूस से तेल के आयात में 21% की बढ़ोतरी को माना जा रहा है।
CREA की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि जैसे-जैसे वैश्विक ऊर्जा संकट ने आपूर्ति श्रृंखला को अस्थिर किया, भारतीय रिफाइनर ने सस्ते और भरोसेमंद स्रोत के तौर पर रूस से कच्चे तेल की खरीद में तेजी लाई है। मई के महीने में रूस से तेल आयात करने वाली यूनिट्स ने अपनी खरीद में खासा इज़ाफ़ा किया, जिससे कुल आयात में इजाफ़ा देखा गया।
भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है तथा अधिकांश तेल की जरूरत विदेशों से पूरी करता है। रूसी तेल की कीमतों में गिरावट और यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में बदलाव ने भारतीय रिफाइनर को इस विकल्प को भुनाने का मौका दिया है। इसके साथ ही, उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी ने भी प्रयोगात्मक रूप से रिफाइनिंग गतिविधियों को बढ़ावा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि रूस से तेल आयात बढ़ने के पीछे कई आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं। एक ओर जहां रूस मुद्रा के सस्ते सौदों से भारत को आकर्षित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के पास तेल आपूर्ति की विविधता बढ़ाने की भी मजबूरी है ताकि वैश्विक संकट की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित रहे।
यह कदम भारत के ऊर्जा क्षेत्र की समग्र रणनीति के तहत भी आता है जिसमें देश अधिक से अधिक स्रोतों से कच्चा तेल प्राप्त कर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है। हालांकि, इस बढ़ोतरी के बावजूद भारत ने मध्य पूर्व और अन्य प्रमुख तेल निर्यातकों के साथ भी व्यापार जारी रखा है।
CREA के आंकड़ों के मुताबिक, मई में रूसी तेल की वृद्धि ने कुल आयात में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, हालांकि कुल क्रूड आयात में अन्य स्रोतों से भी स्थिरता देखने को मिली। नीतिगत पैââर एवं बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच इस विकास को ऊर्जा क्षेत्र में एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार और रिफाइनर दोनों ही सतर्क हैं कि आयात के संतुलन को सही बनाए रखें तथा वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं से देश की ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखते हुए आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करें। आने वाले महीनों में भी रूसी तेल के आयात में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी जिससे भारत की ऊर्जा रणनीति पर ध्यान रहेगा।
इस प्रकार मई माह में रूसी तेल की खपत में बढ़ोतरी ने भारत के कच्चे तेल आयात के परिदृश्य में नए अध्याय जोड़े हैं, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
