दुबई ने भारतीय बाजार और बुनियादी ढांचे को पर्यटन विकास की रीढ़ बनाया
वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक यात्रा पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं, लेकिन दुबई अपनी पर्यटन रणनीति में भारत को केंद्र में रखकर विकास की नींव मजबूत कर रहा है। इस बात की पुष्टि दुबई कॉर्पोरेशन फॉर टूरिज्म एंड कॉमर्स मार्केटिंग (DCTCM) के सीईओ, इस्साम कज़िम ने की है। उन्होंने बताया कि भारत दुबई के पर्यटन क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है।
इस वर्ष दुबई ने व्यवसायिक सहायता के लिए 2.5 अरब दिरहाम (AED) का निवेश किया है, जो स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कारोबारियों के लिए राहत और अवसर प्रदान करता है। इसके साथ ही, दुबई समर सरप्राइजेज, समर रेस्टोरेंट वीक जैसे प्रमुख आयोजन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये इवेंट्स न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि दुबई को एक वैश्विक पर्यटन हब के रूप में स्थापित करते हैं।
इसी के साथ दुबई में आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने के लिए दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी निवेश जारी है। खासतौर पर गोल्ड लाइन मेट्रो के विकास और अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ये परियोजनाएं आने वाले वर्षों में दुबई की ट्रैवल और लॉजिस्टिक व्यवस्था को काफी सुदृढ़ करेंगी।
इस्साम कज़िम ने आगे कहा कि दुबई की पर्यटन रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी लचीलापन दिखा पाता है और बदलते वैश्विक परिवेश के अनुकूल खुद को ढालता है। भारतीय बाजार की बढ़ती संख्या और उसकी खरीदारी की क्षमता को ध्यान में रखते हुए, दुबई लगातार नए विकल्प और सुविधाएं परोस रहा है जिससे भारतीय पर्यटकों का आकर्षण बना रहे।
पिछले कुछ वर्षों में दुबई और भारत के बीच पर्यटन और व्यापार सहयोग में काफी सुधार हुआ है, जो दोनों पक्ष के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। भारतीय पर्यटक दुबई की संस्कृति, शॉपिंग, मनोरंजन और व्यवसाय के लिए एक लोकप्रिय स्थल बनते जा रहे हैं।
दुबई की यह रणनीति यह संकेत देती है कि वे वेस्ट एशिया के संघर्ष भरे माहौल के बावजूद पर्यटन क्षेत्र में मजबूत और स्थायी विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। महत्वपूर्ण निवेश और बाजार की केंद्रित रणनीतियों के कारण दुबई विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह और भी मजबूत करेगा।

