नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) की मातृत्व सेवाओं की सरकारी समीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। डॉ. बिल किर्कअप ने एक अहम आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने समीक्षा से इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि रिपोर्ट से ‘नॉर्मल बर्थ ड्राइव’ की आलोचना को जानबूझकर हटा दिया गया था।
डॉ. बिल किर्कअप, जो इस समीक्षा के प्रमुख सदस्य थे, का यह कहना है कि वे निष्पक्ष और व्यापक जांच की उम्मीद लेकर इस पद पर आए थे, लेकिन रिपोर्ट में मामूली या नकारात्मक पहलुओं को छुपाया गया है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट की अंतिम ड्राफ्ट में उनकी कई चिंता व्यक्त करने वाली टिप्पणियों को हटा दिया गया, जिससे पूरे मुद्दे का सही चित्र प्रस्तुत नहीं हो पाया।
नॉर्मल बर्थ ड्राइव को लेकर उठ रही आलोचनाओं का मुख्य आधार यह है कि मातृत्व सेवाओं में नॉर्मल जन्म को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा जोखिमों पर ध्यान नहीं दिया गया। रिपोर्ट में इस पहल से जुड़े कमियों और संभावित खतरों की चर्चा नहीं की गई, जबकि ये तथ्य जनता के लिए जरूरी थे।
सरकारी प्रवक्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी समीक्षा रिपोर्ट विशेषज्ञताओं और साक्ष्य के आधार पर तैयार की जाती हैं और किसी भी छूट या बदलाव सरकार के नीति निर्धारण के अनुरूप होते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समीक्षा से NHS के मातृत्व सेवाओं में सुधार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मातृत्व सेवाओं की समीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर न केवल महिलाओं की सेहत बल्कि आने वाले पीढ़ी की सुरक्षा जुड़ी होती है। डॉ. किर्कअप का इस्तीफा इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है और सवाल उठाता है कि क्या सरकारी संस्थान अपनी नीतियों व रिपोर्टों में सभी पहलुओं को ठीक तरह से शामिल कर रहे हैं।
इस घटना के मद्देनजर, कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अकादमिक इस समीक्षा की पुनः जांच और सार्वजनिक संवाद की मांग कर रहे हैं ताकि मातृत्व सेवाओं में वास्तविक सुधार हो सके। विशेषज्ञों ने सरकार से आग्रह किया है कि वे समीक्षा प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता लाएं और सभी पक्षों की आवाज को सम्मान दें।
इस विवाद ने NHS की मातृत्व सेवाओं की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। देश में महिलाओं की सुरक्षित मातृत्व देखभाल के लिए व्यापक और दायित्वपूर्ण कदम उठाने की आवश्यकता पर यहीं एक बार फिर ध्यान गया है।
अतः इस मामले की गहराई से जांच और नए सिरे से समीक्षा की उम्मीद की जा रही है ताकि मातृत्व सेवाओं को और अधिक बेहतर और सुरक्षित बनाया जा सके।

