एर्नाकुलम: स्थानीय निकाय ने वेम्बनाडु इकोसिस्टम के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए एक व्यापक अध्ययन करने का निर्णय लिया है। यह पहल परंपरागत पोक्कली खेती की रक्षा और कृषि के सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वेम्बनाडु झील, जो केरल की सबसे बड़ी बैकवाटर प्रणाली है, अपने समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ दशकों से तेजी से हो रहे प्रदूषण, अवैज्ञानिक विकास और जल स्त्रोतों के क्षरण के कारण इसका पर्यावरण गंभीर संकट में है। पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि वेम्बनाडु की बहाली के लिए स्थानीय समुदाय, वैज्ञानिक समुदाय और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर एक सर्वपक्षीय योजना बनाई जाएगी।
पोक्कली खेती, जो इस क्षेत्र की पारंपरिक फसल है, इसकी विशेषता है कि यह वर्षा जल की उपलब्धता पर आधारित होती है और रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को सीमित करती है। पंचायत ने पोक्कली किसानो की मदद के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और वित्तीय सहायता के विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है ताकि यह प्रथा समाप्त न हो और युवाओं को भी इसमें जोड़ा जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि सतत कृषि योजनाओं के तहत जैविक खेती, जल संरक्षण उपाय, और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इन प्रयासों से न केवल स्थानीय कृषि को लाभ मिलेगा, बल्कि वेम्बनाडु की पारिस्थितिकी व्यवस्था भी बेहतर होगी।
विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि अगर इसे सही ढंग से लागू किया गया तो यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकता है। उन्होंने पंचायत से कहा कि कृषि और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाले ऐसे प्रोजेक्ट्स को समय-समय पर मॉनिटर किया जाए और स्थानीय जनता की भागीदारी को सुनिश्चित किया जाए।
इस पहल से क्षेत्र की जल गुणवत्ता, जैव विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था में स्थायी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। पंचायत के लगातार प्रयास से वेम्बनाडु और पोक्कली खेती दोनों ही नए सिरे से जीवित हो सकेंगे, जिससे केरल की समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण दोनों को एक साथ साधा जा सकेगा।

