तमिलनाडु: केंद्र सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के तहत प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिमाह 7 किलोग्राम खाद्यान्न प्रदान करने का प्रावधान किया गया है, लेकिन प्रति परिवार कुल 35 किलोग्राम का अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। इस संशोधन को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस सीमा को बनाए रखने की कड़ी अपील की है।
मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया कि अंत्योदय परिवार जो पहले से ही 35 किलो अनाज पाने के पात्र हैं, यदि उन्हें यह संशोधन लागू किया जाता है तो उनके आधारभूत पोषण की स्थिति प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सीमा उन गरीब परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो भोजन और पोषण के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं।
इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि इससे पहले भी खाद्य सुरक्षा नीति में दिन-प्रतिदिन बढ़ती महंगाई और खाद्य वस्तुओं की कीमतों को ध्यान में रखते हुए अंत्योदय परिवारों को उचित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता रहा है। अगर इस संशोधन को लागू किया जाता है, तो इससे गरीब तबकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और वे बुनियादी पोषण की कमी से जूझ सकते हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि हालांकि संशोधन का उद्देश्य खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता लाना और अनाज की बर्बादी को कम करना है, लेकिन यह जरूरतमंद परिवारों के हितों के विरुद्ध हो सकता है। खाद्य सुरक्षा योजना को इस तरह से संशोधित करना पड़ेगा कि वास्तव में कमजोर वर्गों की सुरक्षा बनी रहे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में करोड़ों अंत्योदय पात्र परिवार रहते हैं जिन्हें बड़ी संख्या में खाद्यान्न की आवश्यकता होती है। इसलिए, इस प्रकार के नियम और संशोधन प्रभावी निर्णयों के साथ लागू किए जाने चाहिए। तमिलनाडु जैसे राज्य जहां सामाजिक सुरक्षा योजनाएं काफी मजबूत हैं, वहां भी इस तरह के बदलाव के प्रभाव की गंभीर चिंता जताई जा रही है।
अंततः, मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विनम्र अनुरोध है कि वे इस संशोधन पर पुनर्विचार करें और गरीब अंत्योदय परिवारों के लिए 35 किलोग्राम खाद्यान्न की पात्रता बरकरार रखें ताकि खाद्य सुरक्षा का मूल लक्ष्य पूरा हो सके।

