बेंगलुरु, 27 अप्रैल: पर्यावरणविदों ने कर्नाटक में तेजी से बढ़ते तापमान और इसके साथ ही होने वाली जलवायु संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए वनीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही पेड़ों की कटाई और हरियाली की कमी के कारण राज्य में गर्मी की लहरें बढ़ रही हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन भी बिगड़ रहा है।
जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के पैटर्न में भी बदलाव देखा जा रहा है, जिसे मोनसून के दौरान अधिक नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया है। इसी संदर्भ में पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण प्रस्तावित किया गया है। पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर कर्नाटक में वनीकरण को प्राथमिकता दी जाए तो न केवल तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है बल्कि जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
हाल के वर्षों में कर्नाटक में औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण वन क्षेत्रों का अत्यधिक दोहन हुआ है। इससे स्थानीय जलवायु परिवर्तन की घटनाएँ जैसे कि अनियमित वर्षा, गर्मी की तेज लहरें और सूखे की समस्या बढ़ी है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार के मुताबिक, “पेड़ों की कमी ने पर्यावरणीय तंत्र को कमजोर किया है, जिससे नमी कम हुई है और तापमान बढ़ा है।”
इसी कारण से कर्नाटक सरकार ने भी हाल ही में राज्य में वृक्षारोपण अभियान तेज करने के लिए योजना बनाई है। इस योजना का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अधिक से अधिक पेड़ लगाना है ताकि प्राकृतिक वातावरण की बहाली हो सके। पर्यावरणविद कहते हैं कि यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि पेड़ न केवल कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, बल्कि मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और स्थानीय जल चक्र को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
स्थानीय समुदायों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। वे लोगों को वृक्षारोपण और इसके महत्व के प्रति जागरूक कर रहे हैं। कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहाँ लोगों ने अपने पड़ोस और आसपास के क्षेत्रों में सामूहिक रूप से पेड़ लगाए हैं। यह प्रयास राज्य में वनीकरण के महत्व को दर्शाता है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले वर्षों में कर्नाटक की जलवायु फिर से संतुलित हो सकेगी।
पर्यावरणविदों का यह भी सुझाव है कि केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि पेड़ों की कटाई को भी नियंत्रित करना आवश्यक है। इसके बिना कोई भी वनीकरण अभियान सफल नहीं हो सकता। अगर यह दोनों पहलू प्रभावी ढंग से लागू किए जाएंगे तो कर्नाटक में मौसम के चरम रूप, जैसे कि गर्मी की लहरें और असामान्य बारिश, कम हो सकेंगी।
अंत में कहा जा सकता है कि कर्नाटक की जलवायु स्थिरता के लिए पेड़ों की आवश्यकता नितांत आवश्यक है और पर्यावरण संरक्षण में सभी स्तरों पर सहयोग जुटाना ही इस संकट से निपटने का सर्वोत्तम तरीका होगा।

