नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा के आंतरिक मूल्यांकन को पास करना अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड के अनुसार, अगर छात्र इस आंतरिक मूल्यांकन में सफल नहीं होते हैं, तो स्कूल उन छात्रों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे। यह कदम छात्रों की भाषा दक्षता बढ़ाने और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया है।
CBSE ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा का आंतरिक मूल्यांकन छात्रों के समग्र प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत, वर्ष 2027-28 से यह प्रावधान कड़ाई से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि अगर कोई छात्र निर्धारित मानदंडों पर खरा नहीं उतरता तो उसे पुनर्मूल्यांकन के लिए स्कूल लाया जाएगा।
बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि तीसरी भाषा का आंतरिक मूल्यांकन केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की बहुभाषी क्षमताओं को प्रोत्साहित करना है। इस पहल से न सिर्फ उनकी भाषा समझना बेहतर होगा, बल्कि अन्य विषयों में भी उनकी संचार क्षमता में सुधार आएगा।
स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए उचित समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान करें। आंतरिक मूल्यांकन में फेल होने वाले छात्रों के लिए पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, ताकि प्रत्येक छात्र को अपनी योग्यता साबित करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम छात्रों के शैक्षणिक विकास के लिए सकारात्मक साबित होगा। इससे वे एक नई भाषा सीखने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जो आज के वैश्विक युग में अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही, यह नियम राज्यों की भाषाई नीतियों के अनुरूप भी है।
इस फैसले को लेकर कई अभिभावकों और शिक्षकों ने इसे स्वागत योग्य बताया है। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर ही भाषा का सही ज्ञान होना बेहतरीन शैक्षणिक आधार तैयार करता है। हालांकि कुछ ने यह सुझाव भी दिया है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और सरल बनाया जाए ताकि छात्रों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
वर्ष 2027-28 के बाद, बोर्ड की यह नई नीति लागू होने पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और इसके प्रभाव का विश्लेषण किया जाएगा। यह देखने में भी रुचि होगी कि कैसे यह निर्णय छात्रों की शैक्षिक उपलब्धियों और भाषाई दक्षताओं में सुधार लाता है।
इस प्रकार, CBSE की यह पहल हमारे शिक्षण तंत्र को मजबूती प्रदान करने और विद्यार्थियों को बहुभाषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में यह नीति वाकई में शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास का एक अहम आधार बन सकती है।

