पेरिस, 27 अप्रैल: फ्रांस की राष्ट्रीय विधानसभा ने सहायक मृत्यु से संबंधित एक विवादास्पद विधेयक को मंजूरी दी है, जो गंभीर रूप से बीमार और अपरिहार्य दर्द से ग्रसित रोगियों को कानूनी तौर पर अपनी जीवन समाप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। इस बिल को लेकर देश में मतभेद गहरे हैं, जिसके समर्थक जीवन के अंतिम चरण में व्यक्ति को अधिक विकल्प प्रदान करने की बात करते हैं, वहीं आलोचक इसके जोखिमों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हैं।
इस विधेयक के तहत, मरीज स्वयं निर्णय ले सकेंगे कि वे दर्द से मुक्त होने के लिए अपनी जिंदगी कब समाप्त करना चाहते हैं, बशर्ते कि इस प्रक्रिया में कड़े नैतिक और कानूनी सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं। समर्थकों का कहना है कि यह पहल मरीजों के मानवाधिकारों की रक्षा करती है और जीवन की गरिमा बनाए रखने का तरीका है।
इसके विपरीत, कई चिकित्सक और सामाजिक कार्यकर्ता इस बिल के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि सहायक मृत्यु को वैध बनाने से समाज में कमजोर समूहों, जैसे बुजुर्गों और मानसिक रोगियों, पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। वे चेतावनी देते हैं कि सही नियंत्रण के बिना इस कानून का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
फ्रांस में पहले से ही जीवन समाप्ति के विषय पर व्यापक बहस चल रही है, जिसमें कई राज्यों ने कुछ सीमित परिस्थितियों में सहायक मृत्यु की अनुमति दी है। नए बिल के साथ यह दायरा व्यापक होगा, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई जांच तंत्र बनाए जाएंगे।
राजनीति में भी यह मुद्दा बहस का विषय बना हुआ है। कुछ पार्टियां इसे मानवता की सेवा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार मानती हैं, जबकि अन्य इसे नैतिक दृष्टि से गलत करार देती हैं। इस कानून को लागू करने के बाद फ्रांस यूरोप के उन देशों में शामिल हो जाएगा, जहां सहायक मृत्यु की सुविधा कानूनी रूप से उपलब्ध है।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस कदम पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई इसे जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे सामाजिक संरचना में संभावित बदलाव के लिए पूर्व चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।
फ्रांस सरकार ने स्पष्ट किया है कि सहायक मृत्यु के अधिकार का प्रयोग पूरी सावधानी और नियमों के तहत ही किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति अवांछित या दबाव में आकर यह निर्णय न ले सके। यह विधेयक अब राष्ट्रपति के अनुमोदन की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके बाद ही यह कानून का रूप लेगा।
यह निर्णय फ्रांस में जीवन के अंतिम चरणों के प्रति सामाजिक और कानूनी सोच में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जो विश्व भर में इस विषय पर बढ़ती हुई जागरूकता का हिस्सा है।

